अहमदाबाद | महानगर ब्यूरो : गुजरात की राजनीति में एक बार फिर आरोपों की झड़ी लग गई है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाकर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। गढ़वी का दावा है कि उन्हें और उनकी पार्टी के नेताओं को पाला बदलने के लिए न केवल करोड़ों रुपये की पेशकश की गई, बल्कि पैसों के लेन-देन के लिए ‘आંગડિયા’ (Angadia) नेटवर्क के इस्तेमाल की भी बात कही गई है।
करोड़ों की पेशकश और आंगडिया का खेल?
इसुदान गढ़वी ने मीडिया के सामने आकर दावा किया कि सत्ता पक्ष द्वारा लोकतंत्र को खरीदने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पास ऐसे इनपुट हैं कि नेताओं को तोड़ने के लिए बड़ी रकम का इंतजाम किया गया है। सबसे चौंकाने वाला दावा ‘आंगडिया’ के जरिए पैसों की हेराफेरी का है, जो गुजरात में पारंपरिक रूप से बड़ी रकम के गुप्त हस्तांतरण के लिए जाना जाता है।
बीजेपी का पलटवार: “हताशा का प्रतीक”
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे गढ़वी की ‘प्रचार की भूख’ करार दिया है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं या आम आदमी पार्टी के पैर उखड़ने लगते हैं, तो वे इसी तरह के काल्पनिक और बिना सिर-पैर के आरोप लगाने लगते हैं।
जनता की अदालत में सुलगते सवाल
इस विवाद ने जनता के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या वाकई राजनीति में जनमत को नोटों के दम पर खरीदने की कोशिश हो रही है?
अगर इसुदान गढ़वी के पास सबूत हैं, तो वे कानूनी कार्रवाई के बजाय केवल बयानबाजी क्यों कर रहे हैं?
क्या ‘आंगडिया’ जैसे पारंपरिक नेटवर्क का राजनीतिक इस्तेमाल सच है?

