लेखक: पवन माकन (ग्रुप एडिटर, महानगर मेट्रो)
दुनिया में सबसे कीमती चीज़ क्या है? सोना, चांदी, दौलत या शोहरत? शायद नहीं। आज के दौर में सबसे महंगी चीज़ है ‘समय’। हम अक्सर भौतिक वस्तुओं के पीछे भागते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि जो लम्हा एक बार बीत गया, वह दोबारा लौटकर नहीं आता।
आज का यह लेख उन लोगों के नाम है जो खामोशी से आपके लिए अपना वक्त कुर्बान करते हैं।
जिंदगी का वह हिस्सा जो दोबारा नहीं मिलता
कहा जाता है कि अगर कोई आपके पीछे अपना समय खर्च कर रहा है, तो उस व्यक्ति को अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा सम्मान दीजिए। ऐसा इसलिए नहीं कि वह खाली है, बल्कि इसलिए क्योंकि वह आपको अपनी जिंदगी की वह चीज़ दे रहा है जिसे वह कभी वापस नहीं पा सकता।
पैसा आता-जाता रहता है, शोहरत घटती-बढ़ती रहती है, लेकिन बीता हुआ समय ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति भी वापस नहीं ला सकती। जब कोई आपको अपना वक्त देता है, तो असल में वह अपनी ‘उम्र’ का एक हिस्सा आपको भेंट कर रहा होता है।
सम्मान देना हमारा कर्तव्य
प्राथमिकता का खेल: व्यस्त हर कोई है, लेकिन जो व्यस्तता के बावजूद आपके लिए समय निकालता है, उसकी नजर में आपकी अहमियत उसकी अपनी थकान से बड़ी है।
भावनाओं का निवेश: समय देना केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक निवेश है। यह विश्वास दिलाता है कि आप अकेले नहीं हैं।
अहंकार का त्याग: आज के स्वार्थी युग में बिना किसी मतलब के किसी को अपना वक्त देना सबसे बड़ी उदारता है।
मेट्रो डायरी की कलम से.
हम अक्सर उन लोगों को नजरअंदाज कर देते हैं जो हमारे लिए हमेशा उपलब्ध रहते हैं। हमें लगता है कि यह उनका फर्ज है, लेकिन याद रखिए, यह उनका फर्ज नहीं, बल्कि आपके प्रति उनका अथाह प्रेम और सम्मान है। अगर आप ऐसे लोगों की कद्र नहीं करते, तो आप अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी खो रहे हैं।
मेरी बात
रिश्तों को ‘उपहार’ की नहीं, ‘उपलब्धता’ की जरूरत होती है। किसी कीमती घड़ी देने से बेहतर है कि किसी को थोड़ा वक्त दिया जाए, क्योंकि घड़ी समय बताती है और वक्त रिश्ते की गहराई।
सोच बदलिए, समाज बदलेगा!

