अहमदाबाद | विशेष ब्यूरो
गुजरात की राजनीति में इन दिनों आरोपों का ऐसा तूफान उठा है, जिसने सत्ता के गलियारों में बेचैनी बढ़ा दी है। विपक्ष ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ऐसा हमला बोला है, जो सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं बल्कि उन सवालों को हवा दे रहा है, जिनकी गूंज अब आम जनता तक पहुंच चुकी है।
मामला सिर्फ आरोपों का नहीं, बल्कि उन हैरान करने वाली घटनाओं का है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। कहीं पुलिस मालखानों से ड्रग्स गायब होने की खबरें सामने आ रही हैं, तो कहीं अवैध खनन को लेकर पूरे पहाड़ों के गायब होने जैसे आरोप राजनीतिक बहस का केंद्र बन गए हैं।
विपक्ष का सबसे तीखा तंज यही है कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि “चूहे भी ड्रग्स खा जाते हैं।” यह हमला सीधे कानून व्यवस्था और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
दूसरी ओर, खनन माफिया और सत्ता संरक्षण को लेकर यह आरोप लगाया जा रहा है कि नेताओं की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि वे “पूरे के पूरे पहाड़ निगल रहे हैं।”
यही आरोप अब इस कहानी को और ज्यादा रहस्यमयी बना रहे हैं।
क्या सचमुच विकास की चमक के पीछे कोई गहरा अंधेरा छिपा है?
क्या दशकों की सत्ता के बाद भी भ्रष्टाचार की यह भूख खत्म नहीं हुई?
या फिर यह सब चुनावी मौसम में बनाया गया एक मनोवैज्ञानिक नैरेटिव है?
जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकारी तंत्र की नाक के नीचे करोड़ों का सामान गायब हो सकता है, तो आखिर जवाबदेही किसकी बनती है।
क्या यह सिर्फ लापरवाही है, या फिर कोई ऐसी परतें हैं जो अभी खुलनी बाकी हैं?
अवैध खनन को लेकर भी चर्चा तेज है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर नदियां छलनी क्यों हो रही हैं, पहाड़ खोखले क्यों हो रहे हैं, और प्राकृतिक संसाधनों पर यह दबाव किसके इशारे पर बढ़ रहा है।
जब आम आदमी ईमानदारी से टैक्स भरता है, तो उसके मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि विकास के नाम पर जुटाया गया पैसा आखिर किस दिशा में जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भूख विकास की नहीं, बल्कि नियंत्रण और संसाधनों पर कब्जे की लड़ाई का संकेत भी हो सकती है।
यही वजह है कि आगामी चुनावों से पहले यह मुद्दा और ज्यादा विस्फोटक रूप ले सकता है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी है—
क्या यह सिर्फ आरोपों का शोर है, या वाकई राज्य के भविष्य को भीतर से खोखला किया जा रहा है?
अब नजर इस बात पर है कि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष किस तरह जवाब देता है, क्योंकि जनता के मन में उठ रहा यह suspense भरा सवाल जल्द थमता नहीं दिख रहा।

