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विशेष खुलासा : पाखंड की आड़ में गंदा खेल: अशोक खरात के मोबाइल से मिले 35 अश्लील वीडियो, कई हाई-प्रोफाइल महिलाओं के शिकार होने की आशंका

अहमदाबाद :धर्म के नाम पर पाखंड और आस्था के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वाले कथित ‘बापू’ अशोक खरात का असली चेहरा अब समाज के सामने आ गया है। पुलिस जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और परेशान करने वाले हैं। तंत्र-मंत्र और अघोरी विद्या के बहाने महिलाओं का यौन शोषण करने वाले इस पाखंडी के काले कारनामों ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है।

35 वीडियो और 8 महिलाओं की बर्बादी की दास्तान

पुलिस द्वारा की गई तकनीकी जांच में अशोक खरात के फोन और अन्य उपकरणों से कुल 35 आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। ये वीडियो इस बात का सबूत हैं कि कैसे इस पाखंडी ने 8 महिलाओं को अपने जाल में फंसाया। बताया जा रहा है कि अघोरी विद्या और अनुष्ठान करने के बहाने इन महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया और फिर इन हरकतों का वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया।

भक्तों की सूची में ‘हाई-प्रोफाइल’ चेहरे

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पाखंडी के भक्तों की सूची में न केवल आम लोग, बल्कि समाज का प्रतिष्ठित माना जाने वाला वर्ग भी शामिल था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, खरात के दरबार में हाजिरी लगाने वालों में शामिल थे:

  • क्लास वन ऑफिसर (सरकारी उच्च अधिकारी)
  • राजनेता
  • नामी बिजनेसमैन
  • जाने-माने डॉक्टर

इन हाई-प्रोफाइल लोगों की संलिप्तता या उनकी मौजूदगी ने इस पाखंडी को समाज में एक बड़ा ‘कवच’ प्रदान किया, जिसकी वजह से वह लंबे समय तक यह काला कारोबार चला सका।

तंत्र-मंत्र के नाम पर मानसिक शोषण

अशोक खरात पीड़ित महिलाओं को मानसिक रूप से इस कदर डराता था कि अगर उन्होंने उसकी बात नहीं मानी तो उनके परिवार पर कोई मुसीबत आ जाएगी या तंत्र-मंत्र से उन्हें नुकसान होगा। इसी डर का फायदा उठाकर वह उनका शारीरिक शोषण करता था। पुलिस अब इस दिशा में जांच कर रही है कि क्या इसके अलावा भी कोई और महिला उसकी शिकार हुई है?

प्रशासन पर सवाल: ‘सफेदपोश’ भक्तों की भूमिका क्या?

महानगर मेट्रो सवाल उठाता है कि क्या ये हाई-प्रोफाइल भक्त खरात के इन कृत्यों से अनजान थे? या फिर सत्ता और पैसे के दम पर इस पाखंडी को संरक्षण दिया जा रहा था? पुलिस फिलहाल हर वीडियो की बारीकी से जांच कर रही है और पीड़ित महिलाओं के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह मामला महज एक अपराध नहीं है, बल्कि अंधविश्वास में अंधे हुए समाज के लिए एक चेतावनी है।

  • ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो

पवन माकन

संस्थापक एवं समूह संपादक, धानी मीडिया

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