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महानगर मेट्रो विशेष: धर्म की राजनीति तो खूब हुई, अब छात्रों के भविष्य का हिसाब कौन देगा?

संपादकीय: पवन माकन (ग्रुप एडिटर) : अहमदाबाद/वडोदरा | हमारे देश में जब भी चुनाव आते हैं, धर्म, जाति और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। खुद को ‘धर्म प्रेमी’ बताने वाली सरकारें बड़े-बड़े महोत्सवों और आयोजनों में व्यस्त रहती हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के सुनहरे भविष्य के लिए ठोस निर्णय लेने का समय सरकार के पास कब आएगा? शिक्षा, रोजगार और छात्र हित के मुद्दों पर सरकार की यह चुप्पी अब एक बड़ा सवाल बन चुकी है।

विद्यार्थी परेशान, सरकार मेहरबान—पर किस पर?

देश के लाखों छात्र अपनी डिग्री हाथ में लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। पेपर लीक की घटनाएं हों, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी हो या शिक्षा का बढ़ता निजीकरण

छात्रों का हित कहीं हाशिए पर धकेल दिया गया है।

“क्या धर्म प्रेम केवल प्रतीकों में है? असली धर्म तो युवा शक्ति को सही दिशा और अवसर देना है। आखिर छात्रों के हक में बड़े फैसले लेने से सरकार क्यों कतरा रही है?”

स्थानीय निकाय चुनाव: मतदाताओं के पास बड़ा मौका

अब स्थानीय स्वराज्य (नगर निगम/नगर पालिका) के चुनाव नजदीक हैं। राजनेता फिर से आपके दरवाजों पर ‘विकास’ और ‘धर्म’ का झंडा लेकर आएंगे। लेकिन इस बार मतदाताओं को सतर्क रहने की जरूरत है।

महानगर मेट्रो की अपील—नेताओं से ये सवाल जरूर पूछें:

  1. शिक्षा का स्तर: हमारे इलाके के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की हालत सुधरने के बजाय बिगड़ क्यों रही है?
  2. स्थानीय रोजगार: हमारे युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार या नौकरियों के क्या अवसर पैदा किए गए?
  3. छात्र सुरक्षा: लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सस्ती शिक्षा के वादे चुनाव के बाद कागजों तक ही क्यों सीमित रह जाते हैं?

पवन माकन का बेबाक विश्लेषण: वोट की चोट ही सही रास्ता

जब तक जनता बुनियादी मुद्दों पर सवाल नहीं पूछेगी, तब तक राजनेता हमें धर्म और भावनाओं के जाल में उलझाकर अपनी कुर्सी सुरक्षित करते रहेंगे। अगर सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है, तो जनता को भी चुनाव के दिन अपनी ताकत दिखाने की जरूरत है।
याद रखिए: जो सरकार आपके बच्चों की शिक्षा और करियर की चिंता नहीं कर सकती, वह ‘धर्म प्रेमी’ होने का केवल ढोंग कर रही है। आने वाले चुनावों में जब उम्मीदवार वोट मांगने आएं, तो उन्हें उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराएं।महानगर मेट्रो का संकल्प: हम जनहित के मुद्दों को दबने नहीं देंगे। छात्रों की आवाज़ ही देश की असली आवाज़ है।

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