खेड़ा (स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव) : कपड़वंज शहर के धोलीकुई इलाके में फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की रेड के बाद हेल्थ सेक्टर में बड़ा धमाका हुआ है। एडमिनिस्ट्रेशन ने इलाके में सालों से प्रैक्टिस कर रहे एक डॉक्टर ‘बाविशी वाला’ को बुलाकर छोटे बच्चों को दी जाने वाली तथाकथित ‘ब्लड थिनर’ की बड़ी मात्रा ज़ब्त की है। हालांकि, रेड के दो दिन के अंदर ही इस हॉस्पिटल में फिर से चहल-पहल देखी गई, जिससे एडमिनिस्ट्रेशन के काम करने के तरीके और रहम पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
बिना लाइसेंस के गैर-कानूनी दवाओं का बड़ा नेटवर्क: 66 हज़ार रुपये ज़ब्त
अचानक रेड के दौरान फ़ूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट की टीम ने हॉस्पिटल से करीब 66,000 रुपये की लाल रंग की दवा ज़ब्त की है। एडमिनिस्ट्रेशन के ऑफिशियल दावे के मुताबिक, डॉक्टर के पास इस दवा को बनाने या स्टोर करने का कोई लीगल लाइसेंस या परमिट नहीं था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ज़ब्त की गई दवा की बोतलों पर:
कोई मैन्युफैक्चरिंग डेट या एक्सपायरी डेट नहीं थी।
प्रोडक्ट पर आधारित बैच नंबर या लीगल डॉक्यूमेंट्स गायब थे।
बिक्री के बिल, केस मेमो या स्टॉक रजिस्टर भी मेंटेन नहीं किए गए थे।
इन सभी सबूतों से यह साफ हो जाता है कि यहां मासूम बच्चों की जान जोखिम में डालकर दवाओं के गैर-कानूनी प्रोडक्शन और बिक्री का काला बाजार चल रहा था।
इतने सालों से चल रहे इस काले धंधे पर एडमिनिस्ट्रेशन आंखें क्यों मूंदे हुए था?
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हॉस्पिटल में पिछले कई सालों से छोटे बच्चों को ऐसी दवाएं दी जा रही थीं। सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय से मासूम बच्चों की सेहत से खुलेआम छेड़छाड़ होने के बावजूद, लोकल हेल्थ सिस्टम गहरी नींद में क्यों सोया हुआ है? क्या यह घिनौना जुर्म किसी बड़े इनडायरेक्ट अंडर में चल रहा था?
7 अगस्त को रेड हुई और 9 अगस्त को हॉस्पिटल फिर से खुल गया! सिस्टम के लिए एक बड़ी चुनौती?
यह रेड 7 अगस्त को फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने की थी और दवा की क्वांटिटी ज़ब्त की थी। लेकिन सिस्टम की नाकामी देखिए या डॉक्टर का घमंड—सिर्फ़ दो दिन में, यानी 9 अगस्त को, यह हॉस्पिटल फिर से गुलज़ार होता दिखा! गैर-कानूनी दवाएँ ज़ब्त होने के बाद भी हॉस्पिटल का चलता रहना पुलिस और हेल्थ डिपार्टमेंट के डर पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
जनता और माता-पिता के ज्वलंत सवाल:
- सख़्त कानूनी कार्रवाई कब होगी?: गैर-कानूनी दवाएँ बनाकर बच्चों की जान खतरे में डालने वाला डॉक्टर सिर्फ़ रेड से खुश हो जाएगा या उसे जेल हो जाएगी?
- हॉस्पिटल को सील क्यों नहीं किया?: इतने गंभीर क्रिमिनल काम के बाद भी हॉस्पिटल को किसने खुला रहने दिया?
- बच्चों की सेहत का क्या?: पहले इस दवा को लेने वाले मासूम बच्चों के शरीर पर हुए साइड इफ़ेक्ट की जाँच कौन करेगा?
माता-पिता और जागरूक नागरिक ज़ोरदार मांग कर रहे हैं कि खेड़ा ज़िला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में सख़्त कदम उठाकर कानून का राज साबित करे।

