गांधीनगर (स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव) : एक तरफ गुजरात सरकार डिजिटल इंडिया, ट्रांसपेरेंट एडमिनिस्ट्रेशन और ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के रेवेन्यू डिपार्टमेंट में ज़मीन को NA (नॉन-एग्रीकल्चरल) करने के प्रोसेस में करप्शन के गंभीर आरोपों ने सरकार के दावों की हवा निकाल दी है। चाहे कोई किसान अपनी मेहनत की कमाई ज़मीन को नॉन-एग्रीकल्चरल बनाना चाहे या कोई छोटा या बड़ा डेवलपर, लगातार आरोप लगते रहे हैं कि ‘अनस्टॉपेबल एडमिनिस्ट्रेशन’ के बिना कागज़ एक टेबल से दूसरी टेबल तक नहीं जाते।
ऑनलाइन प्रोसेस के बावजूद ‘ऑफ़लाइन सेटिंग’ का खेल!
सरकार ने एप्लीकेंट्स की आसानी और करप्शन खत्म करने के मकसद से ज़मीन को NA करने का पूरा प्रोसेस ऑनलाइन पोर्टल पर शिफ्ट कर दिया है। लेकिन असलियत यह है कि टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बावजूद, इंसानी दखल और ब्यूरोक्रेसी की समस्या बनी हुई है। गैर-ज़रूरी सवाल: सिस्टम में एप्लीकेशन आने के बाद, गलत और आम बातों की ‘क्वेरी’ बनाकर फाइल रोक दी जाती है।
टाइम लिमिट का उल्लंघन: हालांकि कानूनी तौर पर इसे एक तय टाइम लिमिट में निपटाना होता है, फिर भी एप्लीकेशन महीनों तक पेंडिंग रखी जाती हैं।
एजेंट राज का दबदबा: एक्टिव एजेंट और बिचौलियों के ज़रिए कलेक्टर ऑफिस और प्रोविंशियल ऑफिस के चक्कर लगाने पर ही फाइल पर साइन होते हैं, वरना आम नागरिक सरकारी ऑफिस के चक्कर लगाते-लगाते थक जाता है।
किस डिपार्टमेंट की परफॉर्मेंस शक के दायरे में है?
ज़मीन को NA करने का प्रोसेस सिर्फ़ एक ऑफिस तक सीमित नहीं है। इसमें कलेक्टर ऑफिस, प्रोविंशियल डायरेक्टर (SDM) ऑफिस, टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट, रेवेन्यू सर्वेयर और लोकल पंचायत या म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से ओपिनियन (NOC) लेना शामिल है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि हर स्टेज पर, NOC देने के नाम पर अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर ‘किश्तें’ या ‘चार्ज’ तय किए गए हैं। जब तक कथित ‘एडमिनिस्ट्रेशन’ का काम नहीं हो जाता, तब तक नेगेटिव ओपिनियन देकर काम रोक दिया जाता है। सरकार की ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी को खुली चुनौती
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की बात करते हैं, लेकिन रेवेन्यू डिपार्टमेंट के निचले और मध्यम लेवल के अधिकारियों की यह मनमानी सरकार की इमेज खराब कर रही है।
जनता के सरकार से सीधे सवाल:
ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद फाइलें महीनों तक पेंडिंग क्यों रहती हैं?
नियमों के मुताबिक समय पर काम न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
जमीन NA की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और इंसानी दखलंदाजी से मुक्त कब बनाया जाएगा?
जमीन नागरिकों और किसानों की रोजी-रोटी और पूंजी से जुड़ा विषय है। अगर इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं, तो राज्य सरकार को तुरंत हाई लेवल पर कार्रवाई का आदेश देना चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि आम जनता का शासन और प्रशासन पर भरोसा बना रहे।

