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अयोध्या रामधन चोरी या अकाउंटिंग में गड़बड़ी? आंदोलनों की आड़ में विवादों को दबाने के खेल पर एक ज्वलंत सवाल!

अयोध्या रामधन चोरी विवाद और उसके बाद दूसरे मंदिरों में चोरी के मामलों ने प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। अधिकारियों के लिए हालात बहुत खराब हो गए थे, क्योंकि हर बार इस्तेमाल होने वाले पुराने बहाने या पड़ोसी देशों पर इल्ज़ाम लगाने की पॉलिटिक्स इस मुद्दे पर काम नहीं आई। लेकिन, विवादों को दबाने और जनता का ध्यान भटकाने के लिए जो घटनाक्रम तय किया गया, वह आज गंभीर सवालों के घेरे में है।

आंदोलनों को सपोर्ट और समय बर्बाद करने की पॉलिसी?

जिस समय रामधन चोरी का मुद्दा गरमा रहा था, उसी समय CJP आंदोलन, रिजर्वेशन हटाना और UGC रोलबैक जैसे आंदोलन अचानक मीडिया के सेंटर में आ गए। आलोचक आरोप लगा रहे हैं कि इन आंदोलनों को लंबा खींचने दिया गया या जनता और मीडिया का ध्यान मुख्य मुद्दे से भटकाने के लिए बढ़ावा दिया गया। मकसद सिर्फ एक था — रामधन चोरी जैसे गरमागरम बहस वाले मुद्दे पर समय निकालना। “कोई चोरी नहीं हुई, बस अकाउंटिंग में गलती थी” — आखिर यह खेल क्या है?

आंदोलनों की आड़ में काफी समय मिलने के बाद, अचानक एक दिन चुपचाप यह खबर फैला दी जाती है कि “अयोध्या में कोई चोरी नहीं हुई, बस अकाउंटिंग में गलती थी!”

जनता और जागरूक नागरिक अब यह सवाल उठा रहे हैं:

अगर यह सिर्फ एक ‘स्टैटिस्टिकल गलती’ थी, तो शुरू में जांच का इतना ड्रामा क्यों किया गया?

क्या आंदोलनों की आड़ में समय लेकर अंदर ही अंदर सब कुछ ठीक कर लिया गया और फिर ‘पूरी तरह रोक’ लगा दी गई?

लोगों की आस्था के पैसे और मंदिरों की संपत्ति का हिसाब-किताब रखने में इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है?

सरकार को जवाब देना होगा

देश के लाखों भक्तों की आस्था रामधन की रकम और मंदिर की संपत्ति से जुड़ी है। सिर्फ “अकाउंटिंग में गलती” कहकर घोटाले को दबाने की इस पॉलिसी के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। प्रशासन और सरकार को यह साफ करना होगा कि क्या यह वाकई एडमिनिस्ट्रेटिव गलती थी या विवाद को दबाने की राजनीतिक चाल!

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