मुंबई (मुकेश सोलंकी) । भविष्य में उत्पन्न होने वाले ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापमान वृद्धि) के गंभीर खतरे और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र में कुओं, तालाबों और झरनों जैसे पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण और पुनरुद्धार करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर शहर के सभी जल स्रोतों का व्यापक सर्वेक्षण करने की पुरजोर मांग भाजपा पार्षद एवं मुंबई भाजपा सचिव सीए प्रतीक कर्पे ने उठाई है।
उन्होंने इस संबंध में बीएमसी प्रशासन के समक्ष एक ‘प्रस्ताव का नोटिस’ प्रस्तुत किया है।बढ़ते शहरीकरण और घटते भूजल स्तर के कारण भविष्य में उत्पन्न होने वाले जल संकट से बचाव के लिए सीए प्रतीक कर्पे ने उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल का सुझाव दिया है। उन्होंने अपने प्रस्ताव में प्रमुख बिंदु रखे हैं जिसमें एआई और सैटेलाइट मैपिंग – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सैटेलाइट मैपिंग तकनीक की मदद से सभी पारंपरिक जल स्रोतों का सर्वेक्षण कर उनके सटीक जीपीएस निर्देशांक (GPS Coordinates) तय किए जाएं। डिजिटल वाटर मैप – जीआईएस (GIS) आधारित ‘डिजिटल वाटर मैप’ तैयार कर शहर के सभी कुओं, बावड़ियों और तालाबों का पूरा ब्योरा एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए। स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग डैशबोर्ड – आईओटी (IoT) सेंसर्स के जरिए जल स्तर और जल गुणवत्ता पर 24 घंटे निगरानी रखने के लिए एक एकीकृत ‘स्मार्ट वाटर मॉनिटरिंग डैशबोर्ड’ विकसित किया जाए। कर्पे के अनुसार, यदि समय रहते इन पारंपारिक जल स्रोतों की डिजिटल मैपिंग और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग शुरू कर दी जाती है, तो मुंबई भविष्य में आने वाले किसी भी बड़े जल संकट से आसानी से निपट सकती है।

