केंद्र सरकार ने आने वाले डिलिमिटेशन के लिए एक बहुत ज़रूरी और मास्टर प्लान तैयार किया है। देश में लोकसभा सीटों को फिर से बांटने और राज्यों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए सरकार 50% सीटें बढ़ाने के फॉर्मूले पर सहमत हो गई है। इस नए फॉर्मूले से मौजूदा 543 लोकसभा सीटें बढ़कर 816 हो सकती हैं। सरकार के इस खास मास्टर प्लान से देश के सभी राज्यों की पॉलिटिकल हिस्सेदारी में बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
50% बढ़ोतरी का ‘गोल्डन फॉर्मूला’: किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा!
खासकर उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच डिलिमिटेशन को लेकर जो बड़ा झगड़ा खड़ा हुआ था, उसे सुलझाने के लिए सरकार ने 50% सीटें बढ़ाने का यह फॉर्मूला निकाला है:
हर राज्य के लिए 50% ज़्यादा सीटें: नए मॉडल के मुताबिक, हर राज्य की मौजूदा लोकसभा सीटों में सीधे 50% की बढ़ोतरी होगी। अनुपात बना रहेगा: राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा प्रतिशत बना रहेगा। इससे दक्षिण भारत के उन राज्यों को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा जो आबादी को कंट्रोल करते हैं।
मेट्रोपॉलिटन और ग्रामीण इलाकों का विकास: सीटों की संख्या बढ़ने से एक MP के नीचे आबादी का बोझ कम होगा, जिससे लोगों की समस्याओं का जल्दी समाधान होगा।
नई संसद बिल्डिंग का सपना होगा साकार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को समर्पित नई हाई-टेक संसद बिल्डिंग में 888 लोकसभा MP के बैठने की शानदार क्षमता है। सरकार के इस 50% सीट बढ़ाने के फैसले से नई संसद की क्षमता का पूरा इस्तेमाल होगा। इस डिलिमिटेशन प्रोसेस के पूरा होने के बाद देश की संसद में महिला आरक्षण (33% आरक्षण) को लागू करना भी आसान हो जाएगा।
विपक्ष का विरोध का हथियार नीचे रख दिया जाएगा!
अभी तक विपक्ष आरोप लगा रहा था कि डिलिमिटेशन से सिर्फ उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे ज़्यादा आबादी वाले राज्यों को फायदा होगा और दक्षिणी राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। लेकिन सरकार के इस 50% बढ़ोतरी के फॉर्मूले से दक्षिणी राज्यों की सीटें भी 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। यह तो तय है कि प्रशासन और सरकार के इस फैसले से भारत का लोकतंत्र और मजबूत और व्यापक होगा।

