गुजरात, जिसे अमूल और दूध प्रोडक्शन में पूरे देश में लीडर माना जाता है, वहां इन दिनों लोगों के बीच बस एक ही बड़ा सवाल चर्चा में है — “गुजरात में एनालॉग पनीर पर बैन क्यों नहीं?” चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं कि होटलों, रेस्टोरेंट, चैरिटी शादियों और लॉरियों में पनीर तिज्जा या पनीर बटर मसाला के नाम पर परोसा जा रहा पनीर शुद्ध दूध का पनीर नहीं बल्कि वेजिटेबल ऑयल, स्टार्च और नुकसानदायक केमिकल से बना ‘एनालॉग पनीर’ है। फिर भी हेल्थ डिपार्टमेंट और फूड एंड न्यूट्रिशन सिस्टम चुप्पी साधे बैठा है!
यह ‘एनालॉग पनीर’ क्या है और यह शरीर के लिए कितना नुकसानदायक है?
असली पनीर शुद्ध दूध को फाड़कर बनाया जाता है, जिसमें प्रोटीन और कैल्शियम भरपूर होता है। जबकि ‘एनालॉग चीज़’ नकली चीज़ है:
खतरनाक चीज़ों का इस्तेमाल: एनालॉग चीज़ बनाने में मिल्क फैट की जगह सस्ता पाम ऑयल, वेजिटेबल फैट, स्टार्च, इमल्सीफायर और केमिकल एसेंस का इस्तेमाल होता है।
सेहत पर बुरा असर: इस नकली चीज़ को खाने से हार्ट अटैक, हाई कोलेस्ट्रॉल, लिवर और किडनी की गंभीर बीमारियों के साथ-साथ पाचन तंत्र की बीमारियां भी होती हैं। यह चीज़ बच्चों और बुजुर्गों के लिए धीमा ज़हर साबित हो रहा है।
सिस्टम की मिलीभगत या लापरवाही? बैन लगाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
हर दिन गुजरात में दूसरे राज्यों से टनों एनालॉग चीज़ की तस्करी होती है या लोकल ब्लैक मार्केटर इसे बनाते हैं। सस्ता होने की वजह से होटल मालिक और कैटरर ग्राहकों से शुद्ध पनीर की कीमत वसूल रहे हैं, इसके लिए वे शुद्ध पनीर की जगह ₹100 से ₹150 प्रति kg वाला यह ज़हरीला एनालॉग पनीर इस्तेमाल कर रहे हैं।
जनता एक तीखा सवाल पूछ रही है:
जब यह प्रोडक्ट सेहत के लिए खतरनाक है, तो फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट इसे पूरी तरह से बैन क्यों नहीं करता? सिर्फ़ दिवाली या त्योहारों पर सैंपल लेने का नाटक करके ब्लैक मार्केट को खुली छूट क्यों दी जाती है?
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर बुलडोज़र चलाकर उन्हें हमेशा के लिए बंद क्यों नहीं किया जाता?
लोगों में जागरूकता और सख्त बैन की मांग
अभी सोशल मीडिया पर #analogpaneer और #gujarat जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। लोगों में बहुत गुस्सा है। अगर सरकार और प्रशासन समय रहते नहीं जागे और गुजरात में ‘एनालॉग चीज़’ की बिक्री और प्रोडक्शन पर परमानेंट बैन नहीं लगाया, तो आने वाले दिनों में गुजरात की पब्लिक हेल्थ को बहुत बड़ा खतरा होगा। अब देखना यह है कि भ्रष्ट प्रशासन कब जागता है और जनता को परोसे जा रहे इस ज़हर पर रोक लगाता है!

