उत्तर 24 परगना के बनगांव में चुनावी जनसभा को संबोधित करती मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
चुनाव प्रचार में कही गई प्रमुख बातें :
- भाजपा पर भरोसा करना ठीक वैसा ही है, जैसा किंग कोबरा (गोखरू सांप) पर भरोसा करना
- पूर्व खाद्य मंत्री ने अन्य मंत्रियों की तुलना में बेहतर काम किया, वह साजिश के शिकार होकर जेल गये
- चुनाव आयोग को साथ लेकर भाजपा ने साजिश रचकर एक खास समुदाय का नाम मतदाता सूची से हटा दिया
- बंगाल की जनता इस तानाशाही का जवाब चुनाव में अपने मत का प्रयोग कर इस साजिश का जवाब देगी
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों का प्रचार जोर शोर से शुरू हो गया है। सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने स्टार प्रचारकों को चुनावी मैदान में उतार कर मतदाताओं को रिझाने में जुट गये हैं। इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को मतुआ समुदाय का गढ़ माने जाने वाले उत्तर 24 परगना के बनगांव में राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंची। यहां चुनावी भाषण में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एक तरह से चुनौती देते हुए कहा, मैं मतदाता सूची से बाहर किए गए लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाऊंगी। मैं पूरी कोशिश करूंगी कि, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने से पहले ही उन सभी लोगों के नाम सूची में वापस आ जाएं। ममता ने चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि, इन्होंने मिलकर एक साजिश रची है, जिसके तहत ये चुनाव खत्म होने के बाद ही इन नामों को दोबारा शामिल करना चाहते हैं। ममता ने कहा, भाजपा पर भरोसा करना ठीक वैसा ही है, जैसा किंग कोबरा (गोखरू सांप) पर भरोसा करना एक समान है।
मतुआओं के गढ़ में गरजीं ममता
ममता ने आगे कहा, मतुआ समुदाय के लोगों से उनके अधिकार छीनने की कोशिश मत करना, अगर आपने ऐसा किया, तो आपको मुझसे ज्यादा मजबूत विरोधी कोई नहीं मिलेगा। चाहे कोई हिंदू हो या मुसलमान या अन्य धर्मों को मानने वाले हैं, इन सभी के अधिकारों का हनन मत करिये। हम इसका बदला जरूर लेंगे और जनता अपने मत का प्रयोग कर इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।
अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत में ही ममता बनर्जी ने लगभग 91 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर किए जाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा, ट्रिब्यूनल ने 32 लाख लोगों के नामों को मंजूरी दे दी है, बाकी बचे सभी नामों को मतदाता सूची से काट दिया गया है। मैं खुद ट्रिब्यूनल जाकर, सूची से बाहर किए गए इन नामों को दोबारा शामिल करवाने की मांग करूंगी। मैं इस बात की संभावना तलाश रही हूं कि चुनाव शुरू होने से पहले ही इन नामों को सूची में वापस शामिल करवा लिया जाए। भाजपा एवं चुनाव आयोग ने मिलकर यह साजिश रची है, जिसके तहत ये मतदान खत्म होने के बाद ही इन नामों को दोबारा शामिल करना चाहते हैं। आप निश्चिंत रहें: हम किसी भी हाल में इस राज्य में कोई डिटेंशन कैंप (निगरानी शिविर) नहीं बनने देंगे।
बनगांव में अपने चुनावी अभियान के दौरान, ठाकुर परिवार की अंदरूनी राजनीति स्वाभाविक रूप से सबके सामने आ गई। इस बार, यह राजनीतिक समीकरण और भी ज्यादा दिलचस्प हो गया है। बगदा से तृणमूल की उम्मीदवार मधुपर्णा ठाकुर हैं, जो ठाकुर परिवार की ही बेटी हैं, जबकि उनकी विरोधी, भाजपा की उम्मीदवार, सोमा ठाकुर हैं, जो इसी परिवार की बहू हैं। इस इलाके में चुनावी प्रचार की जंग अब अपने चरम पर पहुँच चुकी है। राजनीतिक अखाड़े पर ठाकुर परिवार के इस साये को देखते हुए, ममता ने एक कड़ी चेतावनी दी। उन्होने कहा, इस समय ठाकुर परिवार के अंदर ही फूट डालने वाली राजनीति खेली जा रही है। मैं यह बात साफ-साफ कह देना चाहती हूँ कि, इस तरह की चालें चलने से कोई भी नतीजा नहीं निकलने वाला है। अपने भाषण के आखिर में मुख्यमंत्री ने हाथ में ढोल, मंजीरा, और झंडा लिए मतुआ और आदिवासी महिलाओं के बीच घुल-मिल गईं। इस तरह उन्होंने उनकी संस्कृति के साथ अपनी एकजुटता का एक जोरदार संदेश दिया। बनगांव के खैरामारी स्टेडियम में ममता बनर्जी ने एक चुनावी रैली को भी संबोधित किया, जिसमें इस क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ रहे तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार भी मौजूद थे।
ममता ने जनसभा में पूर्व खाद्य मंत्री की जमकर की प्रशंसा
सीएम ने राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किये गये हाबरा से निवर्तमान विधायक एवं राज्य के पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक, जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘बालू’ के नाम से जाना जाता है, ने जेल में एक साल से अधिक समय बिताया। 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर बालू पर अपना भरोसा जताया है। इस बार वह फिर से हाबरा सीट से वह चुनाव लड़ रहे हैं। मंगलवार को बारासात में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने ज्योतिप्रिय का जोरदार समर्थन किया। उन्होंने कहा, मेरी सरकार में ज्योतिप्रिय ने सबसे अच्छा काम किया है। ज्योतिप्रिय के खिलाफ बड़ी साजिश रची गई थी।
ज्योतिप्रिय को क्यों फंसाया गया? ममता ने चुनाव प्रचार के दौरान इसकी भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, साजिश के तहत ज्योतिप्रिय की प्रतिष्ठा को धूमिल किया गया है। केवल ईर्ष्यावश उनके मंत्री को गिरफ्तार करवाया गया है। जांच एजेंशियों को बालू के खिलाफ सबूत का एक टुकड़ा भी नहीं मिला। साया गया? ममता ने अपने भाषण के दौरान इसकी व्याख्या की। सच तो यह है कि ‘भ्रष्ट’ (सीपीएम) पार्टी ने फर्जी पहचानों का इस्तेमाल करके 1.5 करोड़ राशन कार्ड बनवा लिए थे। बालू ने ही इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया था। ममता ने आगे कहा, बालू ने ही डिजिटल राशन कार्ड लागू करने की मुहिम की अगुवाई की थी। इसी उपलब्धि को लेकर शुद्ध द्वेष और नाराजगी के चलते भाजपा ने इस पॉपुलर मंत्री को फंसाने की साजिश रची। ममता द्वारा ज्योतिप्रिय की प्रशंसा करने को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, मुख्यमंत्री द्वारा ज्योतिप्रिय की यह तारीफ उन्हें चुनावी जंग में एक अहम बढ़त दिला सकती है।

