दभोई: मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए गौरी व्रत की महिमा भारत में मशहूर है। शास्त्रों में भी बताया गया है कि इसी व्रत के बल पर दिव्य कन्या को भगवान अनिरुद्ध का पुत्र अपने दिल का प्रेमी मिला था, तभी से इस गौरी व्रत की परंपरा चली आ रही है। आषाढ़ी बीज के दिन गोरमा लगाने के बाद आषाढ़ सुद तेरस से पांच दिनों तक यह पवित्र व्रत मनाया जाता है।
आज दभोई शहर और पूरे तालुका में यह त्योहार शुरू हो गया है। पूरे भारत के साथ-साथ दभोई की कुंवारी लड़कियां भी लगातार पांच दिनों तक बिना नमक का खाना खाकर श्रद्धा से गोरमा की पूजा कर रही हैं।
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शास्त्रों में सभी व्रतों में महिलाओं के लिए खास जगह बताई गई है। इस व्रत के दौरान, जवान लड़कियां काजू, अंगूर, बादाम, अखरोट और आलूबुखारे जैसे ड्राई फ्रूट्स से भरे सुंदर रंग-बिरंगे बैग लेकर शहर की मुख्य सड़कों पर घूमती और जश्न मनाती हुई दिखाई देती हैं। जवान लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए पूरी आस्था के साथ जया पार्वती और गौरी व्रत की पूजा करती हैं।
पुलिस की कड़ी सुरक्षा
दभोई PI ए. टी. पटेल ने खास इंतजाम किए हैं ताकि जवान लड़कियां और लड़कियां गौरी व्रत के दौरान बिना डरे त्योहार मना सकें। शहर की आम सड़कों, बगीचों और मुख्य जगहों पर कड़ी पुलिस सुरक्षा का इंतजाम किया गया है, ताकि व्रत रखने वाली लड़कियां सुरक्षित माहौल में त्योहार मना सकें।

