मेहमदाबाद, मातर और नाडियाड में मौसम की आफ़त; खेड़ा-धोलका और मातर-तारापुर हाईवे पानी में डूबे, ड्राइवर जान जोखिम में डालकर गाड़ी चलाने को मजबूर!
खेड़ा/नाडियाड: मध्य गुजरात के खेड़ा जिले पर मेघराजा पिछले 24 घंटों से बेकाबू और हिंसक रूप से ऐसे बरस रहा है जैसे आसमानी आफ़त बरस गई हो। पूरा खेड़ा जिला जलमग्न हो गया है और जलभराव की बहुत मुश्किल स्थिति पैदा हो गई है। बारिश के आंकड़े इतने चौंकाने वाले हैं कि महमदाबाद में सिर्फ़ 24 घंटे में 20 इंच की भयानक बारिश हुई है! इसके अलावा मातर में 18 इंच और ज़िला हेडक्वार्टर नाडियाड में 15 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे हर तरफ़ बाढ़ जैसे मंज़र बन गए। इस भारी बारिश की वजह से, ट्रैफिक से भरे रहने वाले जिले के मेन रोड और हाईवे पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं।
हाईवे बने स्विमिंग पूल: खेड़ा-धोलका और मटर-तारापुर रोड बंद होने की कगार पर
लगातार हो रही बारिश की वजह से खेड़ा-धोलका रोड पर घुटनों तक पानी भर गया है, वहीं दूसरी तरफ मटर-तारापुर हाईवे पर भी बाढ़ का पानी वापस आ गया है।
जान जोखिम में डालकर सफर: हाईवे से बह रहे पानी के तेज बहाव के बावजूद, कई गाड़ी वाले अपनी जान जोखिम में डालकर या मजबूरी में अपनी गाड़ियां निकाल रहे हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ी मुसीबत आ सकती है।
ट्रैफिक पर स्ट्रक्चरल असर: हाईवे पर पानी भरने की वजह से गाड़ियों का रुकना और ट्रैफिक जाम लगना आम बात हो गई है।
‘महानगर मेट्रो ‘ की चेतावनी: इस सड़क से गुजरने से पहले सौ बार सोचें!
अगर आप भी खेड़ा, धोलका, मटर या तारापुर की तरफ जाने की सोच रहे हैं, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
प्रशासन और ‘पाको गुजरात न्यूज़’ सभी गाड़ी चलाने वालों और नागरिकों से खास अपील करता है कि:
- जब तक कोई बहुत ज़रूरी काम न हो, इन सड़कों पर सफ़र करने से बचें।
- सड़क पर बह रहे पानी के बहाव का अंदाज़ा लगाए बिना अपनी कार या बाइक को पानी में डालने की गलती न करें।
- प्रशासन की दी गई हिदायतों का सख्ती से पालन करें।
‘महानगर मेट्रो ‘ एनालिसिस: बाढ़ और राहत का काम प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
जब सिर्फ़ 24 घंटे में 15 से 20 इंच बारिश हो, तो किसी भी ड्रेनेज या हाईवे सिस्टम की हदें सामने आ जाती हैं। लेकिन अभी की प्राथमिकता सड़क पर फंसे गाड़ी चलाने वालों की सुरक्षा और पानी की निकासी है।
ज़िला प्रशासन ने राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया है, लेकिन अगर बारिश का ज़ोर जारी रहा, तो आने वाले घंटे खेड़ा ज़िले के लिए और मुश्किल साबित हो सकते हैं।

