संजीव मुखिया को राहत मिलते ही देश के लाखों स्टूडेंट्स और पेरेंट्स सदमे में, जांच एजेंसियों के काम पर फिर बड़े सवाल!
नई दिल्ली/अहमदाबाद : देश की सबसे बड़ी और सबसे प्रतिष्ठित NEET-UG 2024 परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। देश भर के लाखों होनहार स्टूडेंट्स दिन-रात मेहनत कर रहे थे, तभी पेपर लीक की खबर ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया। इस केस की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी CBI को सौंपी गई थी। लेकिन अब इस मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ आया है, जिससे शिक्षा जगत और देश के इंसाफ पसंद नागरिकों में भारी हलचल मच गई है।
संजीव मुखिया, जिसे इस पूरे पेपर लीक कांड का ‘मुख्य मास्टरमाइंड’ और किंगपिन माना जा रहा था, उसे CBI ने क्लीन चिट दे दी है। यह खबर सामने आते ही पूरे देश में एक बार फिर गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा।
संजीव मुखिया, जिसे इस पूरे पेपर लीक कांड का ‘मुख्य मास्टरमाइंड’ और किंगपिन माना जा रहा था, उसे CBI ने क्लीन चिट दे दी है। यह खबर सामने आते ही पूरे देश में एक बार फिर गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा।
संजीव मुखिया, जिसे इस पूरे पेपर लीक कांड का ‘मुख्य मास्टरमाइंड’ और किंगपिन माना जा रहा था, उसे CBI ने क्लीन चिट दे दी है। यह खबर सामने आते ही पूरे देश में एक बार फिर गुस्से का ज्वालामुखी फूट पड़ा।
क्या माफिया सिस्टम पर जीत गए?
इस केस में शुरू से ही दावा किया जा रहा था कि संजीव मुखिया और उसके गैंग ने पेपर लीक का एक बड़ा नेटवर्क चलाया था जिसका टर्नओवर करोड़ों रुपये का था। लेकिन CBI की चार्जशीट और क्लीन चिट के बाद अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं:
मुख्य दोषी कौन है?: अगर संजीव मुखिया मुख्य मास्टरमाइंड नहीं है, तो देश के लाखों स्टूडेंट्स के भविष्य से खेलने वाला असली मास्टरमाइंड कौन है?
जांच एजेंसियों का फेल दावा?: जिन दावों के साथ शुरुआत में बड़ी रेड की गई थी, वे अचानक कोर्ट के सामने कमजोर क्यों पड़ गए?
लाखों कैंडिडेट्स का टूटा भरोसा: यह फैसला दिन-रात मेहनत करने वाले ईमानदार स्टूडेंट्स के लिए बड़ा झटका है। अगर मुख्य आरोपियों को ही छोड़ दिया जाएगा, तो सिस्टम पर कौन भरोसा करेगा?
‘महानगर मेट्रो ‘ एनालिसिस: जाल में सिर्फ छोटी मछलियां?
जब भी देश में कोई बड़ा पेपर लीक होता है, तो शुरू में बिचौलियों और छोटी मछलियों को पकड़कर लूटा जाता है। लेकिन जब मुख्य मगरमच्छों तक पहुंचने की बात आती है, तो जांच धीमी हो जाती है या सबूत कानूनी किताबों से गायब हो जाते हैं।
अगर मुख्य दोषी को NEET-UG जैसे नेशनल लेवल के एग्जाम में क्लीन चिट मिल जाती है, तो इससे साफ हो जाता है कि देश के एग्जामिनेशन सिस्टम और जांच सिस्टम में कितनी गंभीर खामियां हैं।
एजुकेशन सेक्टर में ट्रांसपेरेंसी लाने और स्टूडेंट्स का भरोसा वापस पाने के लिए सिर्फ कागजों पर कानून नहीं, बल्कि दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए मजबूत एडमिनिस्ट्रेटिव इच्छाशक्ति की जरूरत है। ‘पाको गुजरात न्यूज़’ युवाओं के हित में और सच के साथ खड़े होकर इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाता रहेगा।

