खान-खनिज विभाग के कमिश्नर धवल पटेल और फ्लाइंग स्क्वाड के ‘चॉवड़ा साहब’ की चुप्पी के बीच करोड़ों की रॉयल्टी चोरी; सीधे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के
अधीन आने वाले महकमे में मचे इस अंधेरराज के खिलाफ ‘महानगर मेट्रो’ का महाविस्फोट!
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वडोदरा/करजन, महानगर मेट्रो:
गुजरात सरकार भले ही गांधीनगर की गद्दी पर बैठकर भ्रष्टाचार मुक्त शासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ के गगनभेदी दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वडोदरा जिले में सत्ताधारी दल के सफेदपोश नेताओं की अंधी भूख के आगे पूरा सरकारी अमला घुटने टेक चुका है। जिले में सरपंच की कुर्सी से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक भ्रष्टाचार का ऐसा दलदल बन चुका है, जहां करोड़ों रुपये का काला कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। वडोदरा जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योत्स्नाबेन वसंतभाई रबारी के पति वसंत रबारी के खिलाफ अवैध रेत खनन, रंगदारी और करोड़ों की रॉयल्टी चोरी के जो पुख्ता दस्तावेज सामने आए हैं, उसने राज्य की सियासत में हड़कंप मचा दिया है।
नर्मदा मैया का सीना चीरकर खुली लूट: एसडीएम और तहसीलदार क्यों मौन?
सूत्रों से मिली अत्यंत सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, नाकेश्वर से पालेज जाने वाले मुख्य मार्ग पर बिना किसी सरकारी मंजूरी या रॉयल्टी पास के अवैध रेत के विशाल पहाड़ खड़े कर दिए गए हैं। पवित्र नर्मदा नदी का सीना चीरकर दिन-रात जेसीबी और डंपरों के जरिए प्राकृतिक संपदा की बेरहमी से लूट मची है। सबसे बड़ा और शर्मनाक सवाल यह है कि जब यह महाघोटाला मुख्य सड़क पर सरेआम दिखाई दे रहा है, तो करजन के एसडीएम शिवम बारिया, वडोदरा कलेक्टर, जिला पुलिस कप्तान (SP) और स्थानीय तहसीलदार आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं? आखिर करोड़ों रुपये के हफ्तों का यह जाल किस-किस दफ्तर तक पहुंच रहा है, जिसने पूरे तंत्र को इन माफियाओं के सामने पंगु और लाचार बना दिया है?
गरीब पशुपालकों के पसीने की कमाई पर डाका: बड़ोंदा डेयरी का महाघोटाला!
सत्ता के भूखे इन कथित दिग्गजों की नीयत इतनी खराब हो चुकी है कि वे गरीब दूध उत्पादकों की गाढ़ी कमाई डकारने से भी बाज नहीं आ रहे। डेयरी के आधिकारिक ऑडिट रिपोर्ट में एक ऐसा भयानक सच सामने आया है जिसने सहकारी क्षेत्र की नींव हिला दी है। बड़ोंदा डेयरी के सबडोल गांव स्थित चिलिंग सेंटर में करीब 50 से 60 लाख रुपये का बड़ा वित्तीय घपला होना सरकारी कागजों पर साबित हो चुका है। इसके बावजूद, गरीब किसानों का पैसा अपने निजी स्वार्थ में उड़ाने वाले इन रसूखदार नेताओं पर एफआईआर (FIRA) दर्ज करने की हिम्मत डेयरी प्रबंधन क्यों नहीं दिखा पा रहा? वडोदरा भाजपा जिला अध्यक्ष या स्थानीय विधायक इस महापाप पर पर्दा डालने के लिए क्या दबाव बना रहे हैं?
खान-खनिज विभाग के आला अफसर हफ्ता वसूली में मस्त!
इस पूरे सिंडिकेट में सबसे शर्मनाक भूमिका खान-खनिज विभाग की सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस विभाग के फ्लाइंग स्क्वाड के प्रमुख चॉवड़ा साहब और खान-खनिज विभाग के कमिश्नर धवल पटेल द्वारा इस खुलेआम हो रहे अवैध उत्खनन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इन उच्च अधिकारियों का ध्यान सिर्फ हर महीने आने वाले लाखों के हफ्तों को समेटने पर है, जिसके कारण खनन माफिया बेखौफ होकर सरकारी खजाने को चूना लगा रहे हैं।
‘महानगर मेट्रो’ के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सीधे और सणસણતા सवाल:
१. मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप: खान और खनिज विभाग सीधे आपके अधीन आता है, फिर भी आपकी नाक के नीचे करोड़ों की रॉयल्टी चोरी जारी है। सारे पुख्ता सबूतों के साथ लिखित शिकायत सीएमओ (CMO) तक पहुंचने के बाद भी अब तक कोई कड़ा एक्शन क्यों नहीं हुआ? क्या आपकी कथित स्वच्छ छवि की आड़ में इन भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है?
२. धवल पटेल और चॉवड़ा पर कार्रवाई कब?: खान-खनिज विभाग के कमिश्नर धवल पटेल और फ्लाइंग स्क्वाड के चॉवड़ा साहब के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रेड डालकर उनकी बेनामी संपत्तियों की जांच क्यों नहीं की जा रही?
३. चिलिंग सेंटर के चोरों को जेल कब?: बड़ोंदा डेयरी के चिलिंग सेंटर में पशुपालकों के 60 लाख रुपये हजम करने वाले नेताओं को सलाखों के पीछे कब भेजा जाएगा? इस मामले को दबाने के पीछे कौन सा पॉलिटिकल प्रेशर काम कर रहा है?
४. बुलडोजर की दिशा वडोदरा कब होगी?: आम जनता पर छोटे-मोटे नियमों के लिए कानूनी डंडा चलाने वाली सरकार, सत्ता के रसूख पर नर्मदा नदी को लूटने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष के पति वसंत रबारी जैसे माफियाओं के अवैध साम्राज्य पर अपना बुलडोजर कब चलाएगी?
वडोदरा का समूचा प्रशासनिक और पुलिस महकमा या तो सत्ता के दबाव में पूरी तरह दबा हुआ है या फिर इस अरबों के खेल में बराबर का हिस्सेदार है। ‘महानगर मेट्रो’ सीधे शब्दों में सरकार को आगाह करता है कि अगर आने वाले दिनों में इन भ्रष्ट नेताओं और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कानूनी हथौड़ा नहीं चला, तो वडोदरा की आक्रोशિત जनता गांधीनगर के गढ़ को घेरने के लिए मजबूर होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी इस लाचार प्रशासन की होगी!

