एलसीबी पीआई के ‘कमाऊ पूत’ भूपत रबारी और खोड़ा रबारी का पूरे वडोदरा जिले में आतंक; करजन से लाखों की अवैध वसूली कर साहबों की तिजोरियां 3
भरने वाले ‘प्राइवेट कारिंदों’ और भ्रष्ट पुलिस के गठजोड़ पर ‘महानगर मेट्रो’ का सीधा प्रहार!
करजन/वडोदरा, महानगर मेट्रो:
गुजरात सरकार भले ही राज्य में सख्त शराबबंदी के ऊंचे-ऊंचे दावे करती हो और गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी भले ही नशामुक्त गुजरात के बड़े अभियान चलाते हों, लेकिन वडोदरा जिले के करजन तालुका से सामने आई जमीनी हकीकत ने गांधीनगर में बैठे आला अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। करजन में कानून व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पूरा तालुका मानो बुटलेगरों (शराब माफिया) और जुआरियों के लिए एक ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित ठिकाना) बन चुका है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर करजन पुलिस थाने की नाक के ठीक नीचे अरबों रुपये का अवैध नेटवर्क धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे काले साम्राज्य की कमान संभालने वाला कोई दूसरा नहीं, बल्कि खुद पुलिस का एक चहेता बिचौलिया (वहीवटदार) हनूभा कामड़िया उर्फ हनू बुटलेगर है, जो पहले भी शराब तस्करी के बड़े मामलों में जेल की हवा खा चुका है और सस्पेंड भी हो चुका है। ऐसे शातिर अपराधी ने आज पूरे करजन तालुका की पुलिस को अपनी उंगलियों पर नचा रखा है।
पीआई के खास मोहरे: भूपत रबारी और खोड़ा रबारी का खेल!
सूत्रों से मिली अत्यंत सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, वडोदरा एलसीबी पीआई के सबसे खास राजदार और महकमे में ‘कमाऊ पूत’ के नाम से कुख्यात भूपत भाई रबारी (डभोई बीट) और खोड़ा भाई रबारी इस पूरे खेल के मुख्य सूत्रधार हैं। ये दोनों बिचौलिये करजन तालुका सहित पूरे वडोदरा जिले के शराब माफियाओं, जुआ अड्डों और अवैध धंधेबाजों से हर महीने लाखों रुपये का मोटा हफ्ता वसूल कर पीआई साहब की तिजोरी तक पहुंचाने का संगठित सिंडिकेट चला रहे हैं। इन कथित कारिंदों और पुलिस की गहरी मिलीभगत के कारण ही जिले में बुटलेगर बेखौफ हो चुके हैं और स्थानीय पुलिस इन अड्डों पर छापेमारी करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाती।
गांव-गांव में चल रहे अवैध अड्डों का ‘लोकेशन’ के साथ पर्दाफाश:
करोड़ों रुपये के इसी हफ्ता राज के दम पर करजन पुलिस स्टेशन से महज २ किलोमीटर दूर स्थित करमडी गांव में लगभग १५ से अधिक भट्टियां बिना किसी डर के चल रही हैं, जहां केमिकल युक्त जहरीली देसी शराब बनाई जा रही है। इसके अलावा:
कुलारी गांव: नई नगरी पानी की टंकी के पास नगीन नाम का बुटलेगर सरेआम वरली मटका (जुआ) खिलवा रहा है।
सापा गांव: नई वसाहत में भी वरली मटका का सट्टा धड़ल्ले से चालू है।
सीमडी से राणपुर रोड: राणपुर गांव का सरपंच और बीजेपी युवा मोर्चा का अध्यक्ष पार्थ शाह खुद पूरे करजन तालुका में विदेशी शराब का बड़ा सिंडिकेट चला रहा है। सीमडी से राणपुर जाने वाले रास्ते पर शराब का भारी जखीरा छिपाए जाने के पुख्ता सबूत मिले हैं।
कंडारी गांव: टावर के पास अमित वसावा नामक बुटलेगर धड़ल्ले से अंग्रेजी शराब बेच रहा है।
बारियावास इलाका: परेश चुनावाड़ा नामक शख्स बिना किसी खौफ के इंग्लिश वाइन की होम डिलीवरी और बिक्री कर रहा है।
एसएमसी की रेड से पहले वॉट्सऐप पर लोकेशन लीक करने का घिनौना खेल:
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विस्फोट यह है कि जब भी कोई जागरूक नागरिक स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) में इन अड्डों की ऑनलाइन शिकायत करता है, तो गांधीनगर से एसएमसी की टीम के पहुंचने से पहले ही वडोदरा एलसीबी के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी (जिसमें एसएमसी के ही एक कांस्टेबल द्वारा वडोदरा एलसीबी पीआई को मुखबिरी करने की चर्चा है) शराब माफियाओं को वॉट्सऐप पर लोकेशन शेयर कर अलर्ट कर देते हैं कि ‘गाड़ी निकल चुकी है, अपने-अपने अड्डे बंद कर दो!’. हालात ये हैं कि वडोदरा एलसीबी पीआई और करजन पुलिस स्टेशन के पीआई पटेल के इन बिचौलियों ने पूरे वडोदरा जिले को शराब माफियाओं के हाथों गिरवी रख दिया है। इस संबंध में जब ‘महानगर मेट्रो’ द्वारा एलसीबी पीआई साहब का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो वे मीडिया के तीखे सवालों से बचते नजर आए और उन्होंने फोन उठाना ही बंद कर दिया!
‘महानगर मेट्रो’ के सरकार और प्रशासन से सणसणाते सवाल:
१. वडोदरा जिले के पुलिस कप्तान (SP) सुशील अग्रवाल और पीआई पटेल अपनी नाक के नीचे चल रहे इस करोड़ों के हफ्ता राज और अपने खास सिपहसालारों भूपत रबारी और खोड़ा रबारी की करतूतों पर आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं? इस रहस्यमयी चुप्पी के पीछे कौन सा बड़ा वित्तीय सांठगांठ छिपा है?
२. जब एलसीबी पीआई और उनके बिचौलिये हर महीने लाखों का हफ्ता वसूल रहे हैं और बेनामी संपत्तियां खड़ी कर चुके हैं, तो एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) इन अधिकारियों के बैंक बैलेंस और संपत्तियों की गोपनीय जांच क्यों नहीं कर रही?
३. स्थानीय विधायक और सांसद इस गंभीर दूषण और केमिकल युक्त जहरीली शराब के अवैध कारोबार पर मौन क्यों हैं? क्या जनता की जान से ज्यादा ये हफ्ता राज जरूरी है?
४. सबसे घातक सवाल—करजन तालुका में जो केमिकल युक्त देसी शराब की भट्टियां बेखौफ चल रही हैं, अगर भविष्य में यहां कोई बड़ा और भयानक 3
‘लट्ठाकांड’ (जहरीली शराब कांड) होता है और मासूम नागरिकों की जान जाती है, तो इसका असली जिम्मेदार कौन होगा? गांधीनगर में बैठी सरकार, जिले के एसपी या फिर हफ्ताखोरी के दलदल में डूबे ये पीआई और उनके कारिंदे?
यह पूरी भ्रष्ट चौकड़ी राज्य के मुख्यमंत्री की स्वच्छ छवि को धूमिल कर रही है। ‘महानगर मेट्रो’ सीधे शब्दों में पूछता है कि, अपराधियों के दम पर और इन कथित ‘कमाऊ पूतों’ के हफ्ता राज पर चलने वाले इस सिस्टम पर गांधीनगर से कब सख्त हथौड़ा चलेगा?

