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ठाणे का ‘समानांतर शासन’: सरकारी इमारत में जुआ, नशा और देशविरोधी फंडिंग का महाजाल! राजा ठाकुर, किरण पुजारी और भूरिया-रफ़ा गैंग का सिंडिकेट; क्या सत्ता के रसूख तले दबी है ठाणे पुलिस?

ठाणे | विशेष खोजी रिपोर्ट: पवन माकन (संस्थापक एवं समूह संपादक, धानी मीडिया)

ठाणे: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र ठाणे में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसे संगठित अपराध सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार न केवल अपराध बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं। ‘महानगर मेट्रो’ की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि वर्तक नगर पुलिस स्टेशन की सीमा के भीतर जिला उद्योग केंद्र जैसी सरकारी इमारत अब अपराधियों का ‘सेफ हाउस’ बन चुकी है।

अपराधियों का ‘महागठबंधन’: राजा ठाकुर से लेकर भूरिया तक

हमारी जांच के अनुसार, इलाके में जुआ, सट्टेबाजी और नशे का यह साम्राज्य कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित गिरोह द्वारा संचालित है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस गैंग में राजा ठाकुर, किरण पुजारी, जीतू जलगांव, नितिन लांडे, शेखर वडाला और मंगेश भोसले जैसे नाम शामिल हैं।

इस सिंडिकेट का सबसे खतरनाक पहलू इसका ‘गुजरात कनेक्शन’ है। राजकोट से मौली और रफ़ा घोड़ी तथा वलसाड से भूरिया जैसे कुख्यात नाम इस जुए के अड्डे और कॉल सेंटर के पीछे के असली खिलाड़ी बताए जा रहे हैं।

सत्ता की धौंस और पुलिस का ‘मौन समर्थन’

सूत्रों का दावा है कि इस गिरोह को राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम का कथित समर्थन प्राप्त है, जिसका इस्तेमाल ये अपराधी पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए करते हैं। आरोप है कि पी.आई. माने और उनका कैशियर इस अवैध कारोबार से मिलने वाले ‘महीने की मलाई’ के बदले इन्हें पूर्ण संरक्षण दे रहे हैं। ठाणे पुलिस कमिश्नर के कड़े आदेशों के बावजूद, इन ठिकानों पर कार्रवाई न होना ‘सिस्टम की सेटिंग’ की ओर इशारा करता है।

सनसनीखेज खुलासा: जुए के पैसे से ‘लव जिहाद’ की फंडिंग?

‘महानगर मेट्रो’ को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस सिंडिकेट का असली चेहरा और भी भयावह है। आरोप है कि भूरिया और रफ़ा जैसे गुर्गे जुए और अवैध धंधों से कमाए गए करोड़ों रुपयों का एक बड़ा हिस्सा गुजरात और महाराष्ट्र में ‘लव जिहाद’ जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संदिग्ध कट्टरपंथी संगठनों को फंड कर रहे हैं।

यह केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सीधे तौर पर देश की सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचाने की साजिश है। अब सवाल यह उठता है कि महाराष्ट्र की हिंदूवादी सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों है? क्या इन अपराधियों के पास इतना रसूख है कि वे देशविरोधी फंडिंग के बावजूद खुलेआम घूम सकें?

महानगर मेट्रो के तीखे सवाल:

  • सवाल 1: जिला उद्योग केंद्र जैसी सरकारी इमारत में जुआ और नशे का अड्डा किसके आदेश पर चल रहा है?
  • सवाल 2: क्या गृह विभाग उन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जो इस सिंडिकेट के साथ मिलकर ‘हफ्ता वसूली’ में लिप्त हैं?
  • सवाल 3: क्या ‘लव जिहाद’ और कट्टरपंथी फंडिंग के इन गंभीर आरोपों की जाँच एनआईए (NIA) या एटीएस (ATS) जैसी एजेंसियां करेंगी?

⁠सम्पादकीय टिप्पणी:

यह रिपोर्ट केवल एक सूचना नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए अंतिम चेतावनी है। युवा पीढ़ी नशे और सट्टे में बर्बाद हो रही है और देश का पैसा देशविरोधी ताकतों के पास जा रहा है। अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो ‘महानगर मेट्रो’ इस लड़ाई को और भी उग्र रूप से जनता के बीच ले जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो

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