एक तरफ, ‘स्वच्छ भारत, स्वच्छ गुजरात’ मिशन के तहत देश और राज्य भर में करोड़ों रुपये खर्च करके सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं और विज्ञापन के होर्डिंग लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डभोई के ऐतिहासिक शहर में इसी अभियान की धज्जियां उड़ती दिख रही हैं। डभोई की सबसे व्यस्त मानी जाने वाली शिनोर चौकड़ी के पास रखे कूड़ेदान के अंदर और बाहर कूड़े के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं, जो नगरपालिका प्रशासन के बेकार और सुस्त कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
मुख्य सड़क पर गंदगी का राज: हजारों यात्रियों को भयानक बदबू के बीच से गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है
शिनोर चौकड़ी कोई आम या सुनसान सड़क नहीं है, बल्कि यह राजपीपला और चनोद, करनाली व पोइचा जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों तक जाने का मुख्य रास्ता है। हर दिन हजारों यात्री इस चौराहे से गुजरते हैं और S.T. बसों या अन्य वाहनों के इंतजार में यहां खड़े होते हैं। फिलहाल, सड़ते हुए कूड़े के ढेर के कारण यहां असहनीय और सिर चकरा देने वाली बदबू फैल रही है, जिससे लोगों का वहां खड़ा होना या सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। यात्री और स्थानीय पैदल चलने वाले लोग इस गंदगी से बहुत परेशान हैं और पूरे इलाके में किसी जानलेवा महामारी के फैलने का डर बना हुआ है।
चिराग तले अंधेरा: नगरपालिका कार्यालय सिर्फ 200 मीटर दूर होने के बावजूद प्रशासन गहरी नींद में है!
सबसे हैरानी और गुस्से वाली बात यह है कि डभोई नगरपालिका का मुख्य कार्यालय उस जगह से सिर्फ 200 मीटर दूर है जहां कूड़े का यह ढेर लगा है। नगरपालिका के जिम्मेदार अध्यक्ष, मुख्य अधिकारी और सफाई विभाग के कर्मचारी हर दिन इसी रास्ते से AC गाड़ियों में गुजरते हैं, फिर भी उन्हें यह गंदगी क्यों नहीं दिखती, यह एक बड़ा सवाल है। प्रशासन की इस भारी सुस्ती और अनदेखी को देखकर स्थानीय लोग शिकायत कर रहे हैं कि सफाई अभियान की बातें सिर्फ कागजों और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह गई हैं, असलियत में जनता नरक जैसी हालत में जी रही है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ का प्रशासन से सीधा सवाल:
क्या नगरपालिका अधिकारी इस इलाके में किसी बड़ी और जानलेवा महामारी के फैलने का इंतजार कर रहे हैं? करोड़ों रुपये का बजट होने के बावजूद, इस मुख्य चौराहे की रोज़ाना सफ़ाई क्यों नहीं होती?
लाखों-करोड़ों की लागत से चल रहे ‘स्वच्छता मिशन’ का पैसा आख़िर कहाँ इस्तेमाल होता है और किसकी जेब में जाता है?
क्या गहरी नींद में सो रहा प्रशासन जागेगा?
अब यह देखना बाकी है कि ‘पक्को गुजरात न्यूज़’ में इस जन-समस्या पर रिपोर्ट छपने के बाद, गहरी नींद में सो रहा डभोई नगर प्रशासन जागेगा या नहीं। यह तो वक़्त ही बताएगा कि यहाँ से कचरे का साम्राज्य कब हटेगा और स्थानीय लोगों व यात्रियों को इस नरक जैसी गंदगी से कब छुटकारा मिलेगा। लेकिन तब तक जनता पूछ रही है कि यह कैसा ‘स्वच्छ गुजरात’ है?

