मेरठ पुलिस ने चार ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह के चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जो चोरी के मोबाईल ओर पुराने खरीदे गए मोबाइलों के मदर बोर्ड वाया दिल्ली असम के रास्ते चीन और बांग्लादेश को बेचते थे।
मेरठ: मेरठ की मेडिकल थाना पुलिस ने मोबाइल चोरी और उसके अवैध कारोबार से जुड़े एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया गिरोह चोरी और कबाड़ से खरीदे गए मोबाइल फोन के मदरबोर्ड से आईएमईआई (IMEI) चिप निकालकर उन्हें असम के रास्ते चीन और बांग्लादेश तक भेजता था। आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में आईएमईआई चिप निकाले गए मोबाइल मदरबोर्ड, अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स तथा एक मोटरसाइकिल बरामद हुई है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों, सप्लायरों और खरीददारों की तलाश में जुटी है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जागृति विहार एक्सटेंशन निवासी सलमान, लक्खीपुरा निवासी फुरकान, अहमदनगर निवासी अनस तथा असम के बारपेटा का रहने वाला मिजानुर रहमान शामिल है। मिजानुर फिलहाल मेरठ के लोहियानगर थाना क्षेत्र स्थित आशियाना कॉलोनी में रह रहा था और पूरे नेटवर्क की कड़ी माना जा रहा है।
मामला जानिए
पुलिस के अनुसार, 27 मई को कालियागढ़ी निवासी नितिन शर्मा के दो मोबाइल फोन चोरी हो गए थे। इस मामले में मेडिकल थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। घटना के बाद पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर शनिवार को रिंग रोड स्थित जागृति विहार एक्सटेंशन में घेराबंदी की गई। यहां पुलिस ने चारों आरोपितों को उस समय दबोच लिया, जब तीन स्थानीय आरोपी दो कट्टों में भरे मोबाइल मदरबोर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स मिजानुर रहमान को सौंप रहे थे।
तलाशी के दौरान बरामद सभी मदरबोर्ड से आईएमईआई चिप पहले ही निकाली जा चुकी थी। पुलिस का कहना है कि आईएमईआई चिप हटाने का मकसद मोबाइल की पहचान पूरी तरह खत्म करना था, ताकि चोरी का सामान आसानी से दूसरे राज्यों और विदेशों तक पहुंचाया जा सके।
पूछताछ में आया सामने
पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह स्थानीय स्तर पर चोरी किए गए मोबाइल फोन और कबाड़ में बिकने वाले खराब मोबाइल बेहद कम कीमत पर खरीदता था। इसके बाद मोबाइलों को खोलकर उनके उपयोगी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स अलग किए जाते थे। सबसे पहले आईएमईआई चिप हटाई जाती थी, जिससे डिवाइस की पहचान समाप्त हो जाए। इसके बाद मदरबोर्ड और अन्य पार्ट्स दिल्ली भेजे जाते थे, जहां से उन्हें असम पहुंचाया जाता था। असम में मौजूद संपर्कों के माध्यम से यह सामान चीन और बांग्लादेश भेजा जाता था।
सूत्रों की माने तो चोरी हुए या पुराने खरीदे मोबाईल फोन का पहले उनका डेटा इक्कठा किया जाता था उसके बाद उनके पार्ट्स को विदेश भेजा जाता था। एक्सपर्ट्स की माने तो ये लोग सस्ते दामों में देता मोबाइलो का डेटा बेचते थे लेकिन आगे खरीदने वाले लोग इस डेटा को काफी महंगे दामों में साइबर ठगी करने वालों को सप्लाई किया करते थे। इस डेटा के जरिए ही लोगों न केवल ठगी का शिकार होते थे बल्कि उनकी महत्वपूर्ण पर्सनल फोटो ओर विडियो ओर अहम जानकारी भी लीक होती थी, जिनके जरिए कई बार वो ब्लैकमेल का शिकार भी हो जाते थे।
पुलिस अधिकारियों ने क्या कहा?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक सामान की जांच कराई जा रही है और पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि चोरी के मोबाइल कहां-कहां से लाए जाते थे, इन्हें कौन खरीदता था और विदेश भेजने की पूरी व्यवस्था कौन संचालित कर रहा था। पुलिस का मानना है कि इस गिरोह के तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती है।

