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दिल्ली में EV पॉलिसी 2.0 लागू, 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक मिलेगी सब्सिडी

दिल्ली सरकार की नई ईवी पॉलिसी 2.0 के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ रहेगा। विभिन्न श्रेणियों में सब्सिडी, चार्जिंग नेटवर्क विस्तार, सरकारी बेड़े का विद्युतीकरण और बैटरी रीसाइक्लिंग की व्यवस्था भी नीति का हिस्सा है।

नई दिल्ली: राजधानी में इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने EV पॉलिसी 2.0 की अधिसूचना जारी कर दी है। नई नीति के तहत 1 जुलाई 2026 से खरीदी जाने वाली EV पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों की EV पर निर्धारित मानकों के अनुसार सब्सिडी का भी लाभ मिलेगा। सीएम रेखा गुप्ता का दावा है कि इस नीति से प्रदूषण कम करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और EV खरीदना किफायती भी होगा।

कई श्रेणियों की EV पर मानकों के अनुसार सब्सिडी

नई EV पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक टूव्हीलर, थ्रीव्हीलर, ई-रिक्शा, मालवाहक गाड़ियों और चुनिंदा फोर व्हीलर EV के लिए 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की सब्सिडी तय की गई है। EV खरीदने पर पात्र उपभोक्ताओं को आवेदन के 60 दिनों के भीतर सब्सिडी सीधे बैंक खाते में उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पुराने BS-4 गाड़ियों को स्क्रैप कराने पर भी एक लाख तक की इंसेंटिव का प्रावधान है। यह इंसेंटिव चार कैटेगरी, टूव्हीलर, थ्रीव्हीलर, निजी फोर व्हीलर कार और ग्रामीण सेवा के लिए है। यह EV पॉलिसी मार्च 2030 तक के लिए लागू होगा।

EV पॉलिसी की खास बातें

सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में राजधानी में EV की हिस्सेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि करना है।
इसके लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं को बढ़ावा, सार्वजनिक स्थानों और आवासीय परिसरों में अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने का प्रावधान भी EV पॉलिसी में किया गया है।
अगले चार साल में दिल्ली में 32 हजार से अधिक चार्जिंग पॉइंट शुरू होंगे नई EV नीति में कमर्शियल गाड़ियों के विद्युतीकरण पर भी विशेष जोर दिया गया है।
ई-रिक्शा, ई-कार्ट और इलेक्ट्रिक मालवाहक गाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अलग प्रावधान किए गए हैं ताकि अंतिम छोर तक माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ सके।

सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता, दोनों में कमी आएगी।

सरकार इस नीति पर 7000 करोड़ रुपये खर्च करेगी। एग्रीगेटर्स सेवा देने वाली कंपनियों को भी अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक गाड़ियां शामिल करनी होगी।
अब एग्रीगेटर्स अपने बेड़े में सिर्फ इलेक्ट्रिक टूव्हीलर ही शामिल करेंगे। हालांकि BS-6 कैटेगरी वाली गाड़ियों को दिसंबर 2026 तक के लिए छूट दी गई है।
नीति लागू होने के बाद सरकारी बेड़े में शामिल होने वाली नई गाड़ियां भी होंगी ई-व्हीकल। रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली

सरकारी गाड़ियों का पूरा बेड़ा होगा इलेक्ट्रिक

नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) नीति के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुवाई में दिल्ली सरकार ने यह भी फैसला किया है कि नीति लागू होने के बाद सरकारी बेड़े में शामिल होने वाले नए वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना, ईंधन पर होने वाला खर्च घटाना और दिल्ली में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना है।

सरकार की EV पर बड़ी पहल

नई नीति के अनुसार, दिल्ली परिवहन निगम (DTC) और परिवहन विभाग द्वारा खरीदी जाने वाली सभी नई इंट्रा स्टेट बसें केवल इलेक्ट्रिक होंगी।
इसके अलावा सरकारी विभागों द्वारा किए या लीज पर लिए जाने वाले गैर-परिवहन और हल्के यात्री वाहन भी जहां तक संभव होगा, इलेक्ट्रिक ही होंगे।
सीएम की पहल पर इस दायरे को केवल सरकारी स्वामित्व वाली गाड़ियों तक सीमित नहीं रखा गया है।

नीति के तहत दिल्ली सरकार के सभी विभागों, स्वायत्त निकायों, निगमों और बोर्डों के साथ-साथ एमसीडी, एनडीएमसी और दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड को भी शामिल किया है, ताकि सरकारी कामकाज में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल हो।

2030 तक 12,000 ई-बसों का लक्ष्य

स्थानीय निकाय, स्वायत्त निकाय या बोर्ड भी अब जो भी गाड़ियां खरीदेंगे, लीज पर या किराए पर लेंगे, उनमें एन-1, एन-2 और एन-3 श्रेणी के मालवाहक और एम-2 और एम-3 श्रेणी के यात्री वाहन इलेक्ट्रिक होंगे। सरकार का अनुमान है कि इस पहल के जरिए वर्ष 2027 तक सरकार के साथ अनुबंधित वाहनों के लगभग 40 प्रतिशत बेड़े को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदला जा सकेगा। वहीं, 2030 तक डीटीसी और परिवहन विभाग के बेड़े में करीब 12,000 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल किए जाने की योजना है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

वाहनों की खरीद के साथ-साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जाएगा। नीति के तहत सरकारी जमीनों पर इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। साथ ही, सभी नए सरकारी भवन और सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को शुरुआत से ही ईवी चार्जिंग के अनुकूल डिजाइन किया जाएगा, ताकि भविष्य में चार्जिंग सुविधाएं आसानी से स्थापित की जा सकें। इसके लिए बिजली की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL) को सौंपी जाएगी।

ई-व्हीकल से बढ़ेगा बैटरी वेस्ट, सही निपटारा ज़रूरी : एक्सपर्ट

दिल्ली में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती संख्या के साथ आने वाले सालों में बैटरी वेस्ट भी तेजी से बढ़ने की आशंका है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल कार, ऑटो और स्कूटर की पुरानी बैटरियां डीलरों तक पहुंच रही हैं, उनके सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था अब भी चिंता का विषय है।

बैटरी वेस्ट प्रबंधन होगी बड़ी परीक्षा

एनवायरोकेटलिस्ट के फाउंडर सुनील दहिया ने कहा कि बैटरी निस्तारण के लिए अभी से तैयारियां करनी होगी। आने वाले दो से तीन सालों में बड़ी संख्या में गाड़ियों की बैटरियां वेस्ट होंगी। ऐसे में तैयारियों के लिए यह उपयुक्त समय है। यदि अभी तैयारियां नहीं की गईं तो बाद में समस्या हो सकती है। वहीं, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता रायचौधरी ने कहा कि नीति में बैटरी वेस्ट और उसकी हेल्थ मॉनिटरिंग जैसे अच्छे प्रावधान हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करना होगी।

बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए PPP मॉडल पर बनेंगे सेंटर

दिल्ली की नई ईवी नीति 2.0 में ई-व्हीकल से बढ़ने वाले बैटरी वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण और रीसाइक्लिंग के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इसके तहत दिल्ली सरकार पूरी राजधानी में PPP मॉडल पर बैटरी कलेक्शन सेंटर का नेटवर्क विकसित करेगी।

साथ ही, यूनिक आइडेंटिफिकेशन आधारित बैटरी ट्रेसेबिलिटी सिस्टम लागू किया जाएगा, जिसकी नोडल एजेंसी दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति होगी।
इस सिस्टम के जरिए बैटरी के निर्माण से लेकर उसके उपयोग, पुनः उपयोग, नवीनीकरण और अंतिम रीसाइक्लिंग की पूरी जानकारी दर्ज होगी।
कंपनियों को हर महीने ट्रेसेबिलिटी की रिपोर्ट DPCC को देनी होगी।

नीति के अनुसार, परिवहन विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि सभी मूल उपकरण निर्माता (OEM) और अन्य संबंधित संस्थाएं बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2022 का पालन करें।

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