प्रयागराज (जमुनापार): उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं प्रयागराज के जसरा ब्लॉक अंतर्गत बैजला ग्राम पंचायत से सरकारी धन के बंदरबांट की सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है। यहाँ विकास कार्य कागजों पर तो चमक रहे हैं, लेकिन धरातल पर भ्रष्टाचार की दीमक उन्हें खोखला कर रही है।
आवास योजना में ‘कमीशन’ का खेल
ग्राम पंचायत बैजला के ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम प्रधान अमृतलाल भारतीय और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) की जुगलबंदी ने गरीबों के सिर से छत छीनने की तैयारी कर ली है। पीड़ित पंकज कोल की आपबीती इस भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल है। पंकज का कहना है कि उनकी पत्नी के नाम आवंटित आवास की किस्त के लिए प्रधान द्वारा 5,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। रिश्वत न देने पर लगभग 15,000 रुपये की धनराशि रोक दी गई है, जिसके चलते गरीब मजदूर अब अपने कामगारों को मजदूरी देने में असमर्थ है और दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है।
घटिया निर्माण और मानकों की अनदेखी
भ्रष्टाचार का यह खेल केवल आवास योजना तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक:
- आंगनबाड़ी केंद्र: एक साल पूर्व बने इस केंद्र में बालू और सीमेंट के मानकों की जमकर अनदेखी की गई। निर्माण सामग्री इतनी घटिया है कि इमारत की मजबूती पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- पंचायत भवन: पंचायत भवन की रंगा-पुताई और मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई, जबकि बजट का पूरा आहरण (Withdrawal) कर लिया गया।
- मनरेगा व नाली निर्माण: मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में भी भारी धांधली की शिकायत है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूलों की डेंटिंग-पेंटिंग और वर्तमान निर्माण कार्यों में गुणवत्ता शून्य है।
बड़ा सवाल: मौन क्यों है जिम्मेदार?
बैजला के आक्रोशित ग्रामीणों का पूछना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद विभाग के उच्चाधिकारी कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहे हैं? आखिर किसके संरक्षण में ग्राम प्रधान अमृतलाल के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह खुलेआम रिश्वत की मांग कर रहा है?
“गरीबों का हक मारकर अपनी तिजोरी भरने वाले इन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर कब होगी दंडात्मक कार्रवाई और कब होगी रिकवरी?” — आक्रोशित ग्रामीण
भाजपा सरकार में जहां विकास की गंगा बहने का दावा किया जा रहा है, वहां बैजला में भ्रष्टाचार का बोलबाला शासन की साख पर बट्टा लगा रहा है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर पंकज कोल जैसे पीड़ितों को न्याय दिलाता है या फिर यह फाइल भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगी।
रिपोर्टर: पवन माकन
ब्यूरो: जमुनापार, प्रयागराज
महानगर मेट्रो न्यूज़

