तेरहवीं के दूसरे दिन जिंदा लौटे गिरधर की कहानी में अब ट्विस्ट आ गया है। वह जेल से छूटने पर डेरा सच्चा सौदा आश्रम चला गया था। लेकिन जब उसे मां की याद आई तो वह वापस घर आ गया।
गाजियाबाद: जेल से छूटने के बाद लापता हुए व्यक्ति के मसूरी नहर में मिले शव को बेटे के रूप में पहचान कर मां ने अंतिम संस्कार कर दिया। सीआईएसएफ के जवान सहित 7 लोगों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए केस भी दर्ज करा दिया। इधर, पुलिस आरोपियों की धरपकड़ में लगी हुई थी। तीन लोगों को हिरासत में भी लिया गया। परिजनों का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद तीनों का पता नहीं चल रहा कि पुलिस ने कहां रखा है। इधर, परिजनों ने 24 जून को उसकी तेरहवीं भी कर दी और अगले ही दिन व्यक्ति घर वापस आ गया।
कथित मृतक के वापस आने से उनकी हत्या के 7 आरोपियों ने राहत की सांस ली है और गिरधर और उनके परिवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नाहल झाल से मिला शव आखिर किसका था। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में शव की पहचान गिरधर के रूप में हुई और जांच में कहां चूक हुई। वहीं, जिन लोगों के खिलाफ अपहरण और हत्या की रिपोर्ट दर्ज की गई थी उसे समाप्त कर आरोपियों को आरोप मुक्त करने के लिए भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
डेरा सच्चा सौदा आश्रम चला गया था गिरधर
पुलिस ने गिरधर का भी बयान दर्ज किया है। उसने बताया कि वह जेल से छूटने के बाद पंजाब में डेरा सच्चा सौदा के आश्रम में चला गया था। उसने आगे बताया कि मां की याद आई, तो 24 को पंजाब से बस पकड़ी और 25 को आनंद विहार पहुंचा।
पुलिस की जांच पर उठ रहे सवाल
कथित मृतक के घर वापस आने के बाद अब पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने शव का डीएनए नहीं कराया और परिजनों के कहने पर मान लिया कि शव गिरधर का है। इस मामले को लेकर डीएसपी बोले कि केस समाप्त कर फर्जी एफआईआर दर्ज कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही अब यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर नाहल झाल में मिला शव किसका था।
गिरधर से पूछताछ के लिए पुलिस टीम को भेजा था। हत्या के मुकदमे को भी खत्म करने की कार्रवाई की जा रही है। फर्जी मुकदमा दर्ज करवाने के मामले में भी कार्रवाई की जाएगी। झाल में से जो शव मिला था वह किसका था, इसके लिए टीमों को लगाया गया है।
सुरेंद्रनाथ तिवारी, डीसीपी, ग्रामीण
आखिर क्या है पूरा मामला
वैशाली सेक्टर-5 की कल्पना सोसायटी में गिरधर बिष्ट अपनी मां देवकी देवी के साथ रहते हैं। परिजन उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बता रहे हैं। 16 मई को सोसायटी के गेट पर स्थित ऑटो मोबाइल की दुकान चलाने वाले 3 भाइयों सुनील, शैलेश और धर्मेंद्र से उनका विवाद हो गया था। गिरधर ने शैलेश के सिर पर हथौड़े से हमला कर दिया था। इस पर पुलिस ने 17 मई को गिरधर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। 21 मई को गिरधर को निजी मुचलके पर जेल से रिहा कर दिया गया था, लेकिन वह घर नहीं पहुंचे तो मां ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
सात लोगों पर दर्ज हुआ था हत्या का केस
12 जून को गंगनहर में युवक का शव मिलने पर परिवार ने उसकी शिनाख्त गिरधर के रूप में की और पिटाई से मौत होने का आरोप लगा 7 लोगो के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस ने मामले में नामजद सुनील, शैलेश और धर्मेंद्र को हिरासत में लिया था। पुलिस का कहना है कि तीनों को पूछताछ के बाद छोड दिया गया था। हालांकि परिजनों का कहना है कि पूछताछ के बाद से ही तीनों का कुछ अता-पता नहीं है।
ठेली लगाने वाली महिला पर डाला था गर्म पानी
सोसायटी के बाहर ही अंडे की ठेली लगाने वाली महिला नैना ने बताया कि 13 मई को गिरधर ने बिना किसी कारण उन पर गर्म पानी डाल दिया था। वह बचने के लिए शैलेश, सुनील और धर्मेंद्र की दुकान में घुस गई थी। तीनों भाइयों ने उसे बचाया था। इसके चलते 16 मई को गिरधर ने शैलेश के सिर पर हथौड़े से वार कर दिया था। इस पर तीनों भाइयों ने गिरधर की पिटाई कर पुलिस को सूचना दी थी। इसके बाद पुलिस ने गिरधर को जेल भेज दिया था।

