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शादी कार्ड पर अब लिखनी होगी दूल्हे-दुल्हन की जन्म तिथि, बाल विवाह रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम

महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि राज्य सरकार बाल विवाह की अवैध प्रथा को रोकने के उद्देश्य से शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्म तिथि लिखना अनिवार्य करने के नियम पर गंभीरता से विचार कर रही है.

महाराष्ट्र में बाल विवाह जैसी अवैध प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए राज्य सरकार एक अनोखा नियम लागू करने पर विचार कर रही है. इसके तहत अब शादी के निमंत्रण पत्रों (कार्ड) पर दूल्हे और दुल्हन की जन्म तिथि लिखना जरूरी होगा. साथ ही बाल विवाद में मदद करने वालों के खिलाफ में FIR दर्ज की जाएगी.

महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बुधवार को विधानसभा में बीजेपी सदस्य अतुल भातखलकर द्वारा उठाए गए एक सवाल के जवाब में बताया कि राज्य सरकार बाल विवाह की अवैध प्रथा को रोकने के उद्देश्य से शादी के निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्म तिथि लिखना अनिवार्य करने के नियम पर गंभीरता से विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि राज्य का टारगेट अगले पांच सालों में इस गैर-कानूनी प्रथा की घटनाओं को 10 प्रतिशत से नीचे लाना है.

महाराष्ट्र ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर शादी के निमंत्रण कार्ड पर दूल्हा और दुल्हन दोनों की जन्मतिथि लिखने की उनकी प्रक्रिया का अध्ययन करने को कहा है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ग्रामीण विकास और कानून एवं न्याय विभागों के साथ बातचीत करके इसी तरह की व्यवस्था को अपनाने की संभावना की जांच करेगी.

‘बाल विवाह के आंकड़ों में आई गिरावट’

महिला एवं बाल विकास मंत्री ने सदन को सूचित किया कि महाराष्ट्र में बाल विवाह की दरों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. साल 2019-21 के सर्वे में राज्य में बाल विवाह का आंकड़ा 21.9 प्रतिशत था जो नवीनतम 2023-24 के सर्वे में घटकर 19.6 प्रतिशत पर आ गया है. ये स्थिति देश के मौजूदा राष्ट्रीय औसत (लगभग 20.1 प्रतिशत) के मुकाबले काफी बेहतर है.

प्रशासनिक आंकड़ों को साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि साल 2025-26 में अब तक सरकारी तंत्र ने मुस्तैदी दिखाते हुए 1,434 बाल विवाह रुकवाए हैं और इस संबंध में 136 FIR भी दर्ज की हैं.

अदिति तटकरे ने बताया कि साल 2024-25 में 1,495 बाल विवाह रोके गए थे, जबकि 2023-24 में 1,253 शादियां रुकवाई गईं और 108 एफआईआर दर्ज हुईं. इससे पहले 2022-23 में 930 मामले रोके गए और 81 FIR हुईं.

वहीं, 2021-22 में 831, 2020-21 में 519, 2019-20 में 240 और 2018-19 में 147 बाल विवाह रोके गए थे और 10 FIR दर्ज की गई थीं.

उन्होंने स्पष्ट किया कि रोके जाने वाले बाल विवाहों की बढ़ती संख्या का मतलब ये नहीं है कि ये मामले बढ़ रहे हैं, बल्कि ये सरकारी मशीनरी द्वारा बेहतर पहचान, रिपोर्टिंग और तुरंत हस्तक्षेप को दिखाता है.

शादी कराने वाले मददगारों पर भी होगी FIR

सरकार ने इस सामाजिक बुराई में शामिल लोगों के खिलाफ अपनी कार्रवाई का दायरा काफी बढ़ा दिया है. मंत्री ने साफ किया कि अब केवल बाल विवाह कराने वाले परिवार के सदस्यों पर ही कार्रवाई नहीं हो रही, बल्कि जानबूझकर ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देने वाले पंडितों (पुजारियों), संगीतकारों और विवाह समारोह में शामिल होने वाले अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं.

इस अवैध प्रथा को रोकने के लिए मैदानी स्तर पर प्रशासनिक कमेटियां सक्रियता से काम कर रही हैं. राज्य के जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) की अध्यक्षता में गठित जिला एक्शन फोर्स, ग्राम संरक्षण समितियां और तालुका तथा ग्राम पंचायत स्तर पर बनी समितियां बाल विवाह के खिलाफ मुस्तैदी से काम कर रही हैं, जिन्हें सरकार द्वारा और अधिक वित्तीय व प्रशासनिक रूप से मजबूत किया जा रहा है.

सदन में चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर ने बीड, छत्रपति संभाजीनगर और परभणी जैसे जिलों में इस समस्या की गंभीरता का मुद्दा उठाया था. मंत्री ने स्वीकार किया कि विशेष ध्यान देने के लिए 6 जिलों की पहचान की गई है, जिनमें बीड और मराठवाड़ा के अन्य जिले शामिल हैं. इन इलाकों में परिवारों का गन्ने की कटाई के लिए होने वाला पलायन बाल विवाह के पीछे का एक मुख्य कारण बनकर उभरा है.

इस जटिल समस्या से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने एक ठोस और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार की है. तटकरे ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सरकार प्रवासी मजदूरों के बीच विशेष पहुंच बनाने और बाल देखभाल केंद्रों तथा रेजिडेंशियल होम्स जैसी सुविधाओं का विस्तार करने की योजना बना रही है, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि पलायन की अवधि के दौरान बच्चे सुरक्षित वातावरण में रहें.

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