लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अगले महीने संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (UBT) के बागी सांसदों के भविष्य पर फैसला लेने की उम्मीद है। यह तब हुआ जब ओम बिड़ला ने महाराष्ट्र के नेताओं से मुलाकात की। टीएमसी और डीएमके का भी पेंच फंसा है।
मुंबई : लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के बागी सांसदों के मामले पर कोई फैसला लेंगे। स्पीकर तृणमूल और शिवसेना (UBT) नेताओं से दो बार मिल चुके हैं और दोनों पक्षों की बात सुन चुके हैं। DMK और तृणमूल सांसदों के INDIA ब्लॉक से अलग बैठने के मुद्दे पर भी फ़ैसला लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा सचिवालय में कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञों के साथ इस पर चर्चा चल रही है।
अध्यक्ष पहले ही मूल पार्टियों और अलग हुए गुटों, दोनों का पक्ष सुन चुके हैं। TMC के मामले में, बिरला ने पार्टी के लोकसभा नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और बागी गुट के सदस्यों से मुलाकात की। शिवसेना (UBT) में विभाजन के मामले में भी ऐसी ही प्रक्रिया अपनाई गई थी।
मामले में अध्ययन जारी
सूत्रों के अनुसार, संसद से जुड़े कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ अभी इस मामले की जांच कर रहे हैं और अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी सिफारिशें देने की उम्मीद है। इसी तरह की स्थितियों में पीठासीन अधिकारियों के पिछले फैसलों का भी अध्ययन किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी फैसला कानूनी और संवैधानिक रूप से सही हो। इस बीच, लोकसभा सचिवालय मॉनसून सत्र से पहले बैठने की संभावित व्यवस्था पर काम कर रहा है; यह सत्र आमतौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में बुलाया जाता है।
टीएमसी, शिवसेना के साथ डीएमके का भी मामला
TMC और शिवसेना (UBT) के बागी गुटों के अलावा, DMK ने भी कांग्रेस के साथ अपना लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन टूटने के बाद बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की है। कांग्रेस ने हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK के साथ हाथ मिलाया है।
सबसे बड़ा मामला टीएमसी का
अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस से जुड़ी है। 2024 के लोकसभा चुनावों में TMC के टिकट पर चुने गए 29 सांसदों में से 20 अलग हो गए हैं और उन्होंने खुद को नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जोड़ लिया है। यह हावड़ा स्थित एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी है। इस समूह ने लोकसभा में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग की है और नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति समर्थन और NDA में शामिल होने की इच्छा भी जताई है।
तब से एक TMC सांसद का निधन हो गया है, जिससे सदन में पार्टी के सदस्यों की संख्या 28 रह गई है। महाराष्ट्र में, शिवसेना (UBT) के टिकट पर चुने गए नौ सांसदों में से छह ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है।
क्या है नियम
दोनों पार्टियों ने ओम बिरला से दलबदल विरोधी कानून लागू करने और बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने का आग्रह किया है। उन्होंने तर्क दिया है कि दसवीं अनुसूची के तहत सुरक्षा तभी मिलती है जब पूरी पार्टी का दो-तिहाई हिस्सा किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में विलय हो जाता है, न कि तब जब विधायक व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से पाला बदलते हैं। अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर के सामने व्यक्तिगत रूप से TMC का पक्ष रखा और बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली 20 अलग-अलग याचिकाएं सौंपीं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि बागियों का NCPI में विलय का दावा कानूनी रूप से टिकने लायक नहीं है, क्योंकि किसी भी वैध विलय में केवल चुने हुए प्रतिनिधियों के बजाय पूरी राजनीतिक पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों का शामिल होना जरूरी है।
ओम बिड़ला के सामने क्या हुआ
शिवसेना (UBT) के नेताओं अनिल देसाई और अरविंद सावंत ने भी ओम बिड़ला से मुलाकात की और बागी सांसदों द्वारा दी गई किसी भी जानकारी या आवेदन का विवरण मांगा। सावंत ने कहा कि हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें बागियों की ओर से कोई अपील मिली है। उन्होंने आगे बताया कि स्पीकर ने उन्हें सूचित किया कि लिखित रूप में कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ है। देसाई ने कहा कि उन्होंने बिड़ला के सामने इस बात पर जोर दिया कि दसवीं अनुसूची में अस्पष्टता की बहुत कम गुंजाइश है। विधायिक दल का कोई भी समूह अपनी मर्ज़ी से किसी दूसरी पार्टी में विलय नहीं कर सकता, भले ही उनके पास दो-तिहाई बहुमत हो।
आदित्य ठाकरे ने कहा इंसाफ की उम्मीद
यह ताजा विवाद एकनाथ शिंदे द्वारा अविभाजित शिवसेना में किए गए नाटकीय विभाजन के चार साल बाद सामने आया है, जिसके कारण महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। फरवरी 2023 में, चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी थी। इस बीच शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि उन्हें इंसाफ की उम्मीद है।

