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जबलपुर में सड़क खराब होने के कारण गर्भवती को 1 किलोमीटर चलना पड़ा पैदल, इलाज के दौरान मां और अजन्मे बच्चे की मौत

जबलपुर की ब्रजपुरी कॉलोनी में सड़क बेहद खराब होने के कारण एक सात महीने की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, जिससे इलाज के दौरान उसकी और अजन्मे बच्चे की मौत हो गई।

मध्य प्रदेश के जबलपुर से सिस्टम की लापरवाही और बदहाल बुनियादी ढांचे की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां के ब्रजपुरी कॉलोनी की रहने वाली साढ़े सात महीने की गर्भवती महिला ममता कुशवाहा और उनके अजन्मे बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार शाम को ममता को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुआ था। घर तक जाने वाली सड़क इतनी ज्यादा खराब और जर्जर थी कि कोई भी वाहन चालक उस इलाके के अंदर आने को तैयार नहीं हुआ।

मुख्य सड़क से ऑटो से पहुंचीं अस्पताल

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवीन कोठारी के मुताबिक, घर से मुख्य मार्ग को जोड़ने वाली सड़क बुरी तरह क्षतिग्रस्त थी। इस वजह से वहां मौजूद आशा कार्यकर्ता ममता को पैदल ही एक किलोमीटर तक लेकर आई। इसके बाद मुख्य सड़क से उन्हें एक किराए के ऑटो-रिक्शा के जरिए एल्गिन अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर ममता की स्थिति काफी गंभीर हो गई और उन्हें सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी।

डॉक्टरों ने नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया, जहाँ उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। हालांकि, तमाम कोशिशों के बाद भी डॉक्टर मां और बच्चे दोनों को नहीं बचा सके।

इस दुखद घटना से जुड़े मुख्य पहलू:

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, ममता ने उस महीने में दो बार प्रसव पूर्व (एंटीनेटल) जांच कराई थी।
ममता कुछ समय सतना में रही थीं, जिसके कारण उनके गर्भावस्था पंजीकरण में करीब चार महीने की देरी हुई थी।
शुरुआती जांच में आपातकालीन प्रोटोकॉल के उल्लंघन की बात सामने आ रही है, जिसकी बारीकी से जांच की जा रही है।
नियमों के मुताबिक, आशा कार्यकर्ता को खुद वाहन बुक करने के बजाय सीधे 108 एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करना चाहिए था।

लापरवाही पर जांच के सख्त आदेश

इस पूरी घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। सीएमएचओ नवीन कोठारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत और उच्च स्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या समय पर सही आपातकालीन मदद न मिलने के कारण महिला की स्थिति बिगड़ी। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद जो भी कर्मचारी या अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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