Homeभारतछतीसगढ़गांजा तस्करी में फंसे पुणे के दो निर्दोष युवकों को मिला इंसाफ

गांजा तस्करी में फंसे पुणे के दो निर्दोष युवकों को मिला इंसाफ

राजनांदगांव। थाना सोमनी में दर्ज डेढ़ लाख रुपये मूल्य के गांजा तस्करी प्रकरण में महाराष्ट्र के पुणे जिले के दो आरोपियों को जिला एवं सत्र न्यायालय राजनांदगांव ने दोषमुक्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) डी.आर. देवांगन की अदालत ने 19 जून 2026 को अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अभियुक्त वसंत श्यामराव ओंकारे एवं राहुल अशोक दोईफोड़े को आरोपों से बरी कर दिया। दोनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता करनजीत बोधानी ने प्रभावी पैरवी की।

क्या था मामला

अभियोजन के अनुसार 13 सितंबर 2025 को थाना सोमनी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि दुर्ग से पुणे जा रही बस क्रमांक CG-04/QG-9111 में दो व्यक्ति अलग-अलग बैगों में गांजा लेकर यात्रा कर रहे हैं और उनके पारीनाला क्षेत्र के आसपास उतरने की संभावना है। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बस को थाना सोमनी के सामने रोका।

तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से दो बैगों में कुल 16 किलोग्राम गांजा बरामद किया जाना बताया गया था। जब्त गांजे की अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 60 हजार रुपये आंकी गई थी। इस आधार पर दोनों आरोपियों के विरुद्ध स्वापक औषधि एवं मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (NDPS Act), 1985 की धारा 20(बी)(ii)(बी) के तहत अपराध दर्ज कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया था।

माननीय उच्च न्यायालय में दायर की थी याचिका

आरोपियों के द्वारा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अधिवक्ता आशीष गंगवानी व करनजीत बोधानी के द्वारा जमानत याचिका दायर की थी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय से आरोपीगण को जमानत मिल गई थी व सत्र न्यायालय को 6 माह के भीतर प्रकरण के ट्रायल को पूर्ण करने का भी आदेश दिया था जिसके चलते उक्त प्रकरण 6 माह के भीतर निराकृत हो गया l*

न्यायालय में चली लंबी सुनवाई

प्रकरण की सुनवाई के दौरान अभियोजन से विभिन्न गवाहों के बयान एवं दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेश वर्मा ने पक्ष रखा, जबकि आरोपियों की ओर से अधिवक्ता ने मामले के तथ्यों, जब्ती प्रक्रिया और साक्ष्यों की वैधानिकता को लेकर विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा एनडीपीएस अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का गहन परीक्षण किया।

साक्ष्यों के अभाव में मिली राहत

विशेष न्यायाधीश डी.आर. देवांगन ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित करने में सफल नहीं हो सका। न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त घोषित कर दिया।

अधिवक्ता करनजीत बोधानी की पैरवी रही अहम

मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता करनजीत बोधानी ने कानूनी बिंदुओं और प्रक्रियात्मक कमियों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा। बचाव पक्ष की दलीलों पर विचार करते हुए न्यायालय ने अंततः दोनों आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया।

फैसले के बाद मिली बड़ी राहत

करीब नौ माह तक चले इस चर्चित एनडीपीएस प्रकरण में न्यायालय के फैसले के बाद पुणे निवासी दोनों आरोपियों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिली है। न्यायालय के इस निर्णय को जिले के महत्वपूर्ण एनडीपीएस मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसमें अभियोजन पक्ष आरोपों को विधिसम्मत रूप से सिद्ध नहीं कर पाया।

प्रकरण विवरण:

थाना : सोमनी, जिला राजनांदगांव
अपराध क्रमांक : 210/2025
आरोप : 16 किलोग्राम गांजा परिवहन
अधिनियम : NDPS Act की धारा 20(बी)(ii)(बी)
निर्णय तिथि : 19 जून 2026
न्यायालय : विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) डी.आर. देवांगन
बचाव पक्ष अधिवक्ता : करनजीत बोधानी
विशेष लोक अभियोजक : महेश वर्मा
निर्णय : दोनों आरोपी दोषमुक्त (बरी) ।

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