Homeभारतमध्यप्रदेशदिव्यांगजन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ...

दिव्यांगजन अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण : डॉ पंकज मारूमध्यप्रदेश न्यायिक अकादमी में प्रदेश के न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को किया संबोधित

नागदा । मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी, जबलपुर द्वारा दिव्यांगजन अधिकारों एवं समावेशी न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शनिवार को “दिव्यांगजन से संबंधित विषयों पर संवेदनशीलता कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से जिला न्यायाधीश, विशेष लोक अभियोजक, अतिरिक्त लोक अभियोजक, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिव एवं अन्य न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित थे ।

स्नेह के सचिव लायन विनयराज शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में न्यायाधीश, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति श्री विवेक अग्रवाल, अध्यक्षता मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक श्री उमेश पाण्डव, विशेष अतिथि मध्यप्रदेश राज्य दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया तथा न्यायिक अकादमी के अतिरिक्त निदेशक श्री सचिन शर्मा उपस्थित थे । इस अवसर पर अपने प्रेजेंटेशन के माध्यम से डॉ मारू ने बताया कि दिव्यांगजन अधिकार केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक एवं मानवाधिकारों का विषय है। उन्होंने न्यायपालिका की संवेदनशील एवं सक्रिय भूमिका पर बल देते हुए कहा कि न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करना प्रत्येक न्यायिक अधिकारी का दायित्व है। मारू ने “मध्यप्रदेश में दिव्यांगजन अधिकार : कानून और वास्तविकता के बीच की खाई को पाटना” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए संविधान में निहित समानता एवं गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016, समावेशी शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक हस्तक्षेप, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, सुगम्यता, न्याय तक पहुंच, बौद्धिक दिव्यांगता एवं ऑटिज्म से जुड़े मुद्दों, महिलाओं एवं बालिकाओं के अधिकारों तथा न्यायिक हस्तक्षेप के उभरते क्षेत्रों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से युक्तियुक्त सुविधा, डिजिटल सुगम्यता, आरक्षण, दिव्यांग प्रमाणन, यूडीआईडी, सामुदायिक जीवन एवं राज्य की जवाबदेही जैसे विषयों पर न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांग पेंशन को कानून के अनुसार बढ़ाने एवं शून्य से छह वर्ष तक के दिव्यांग बच्चों को भी इसे प्रदान करने , उनकी निशुल्क शिक्षा एवं समय सीमा में यूडीआईडी कार्ड जारी करने तथा उनके आवासीय परियोजनाओं के लिए मानक दिशा निर्देश जारी करने को लेकर न्यायपालिका के हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया ।

प्रस्तुति के दौरान यह भी बताया गया कि दिव्यांगजन अधिकारों से संबंधित अधिकांश प्रावधान कानूनों में उपलब्ध हैं, किन्तु वास्तविक चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। न्यायपालिका, प्रशासन एवं समाज के समन्वित प्रयासों से ही दिव्यांगजनों को समान अवसर एवं गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित न्यायिक अधिकारियों ने डॉ. पंकज मारू की प्रस्तुति की सराहना करते हुए दिव्यांगजनों के लिए बनाए गए संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन में अपना पूर्ण सहयोग देने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए न्यायिक प्रक्रियाओं, न्यायालय परिसरों एवं न्याय तक पहुंच को अधिक सुगम एवं समावेशी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी कार्य करने हेतु आश्वस्त किया । यह कार्यक्रम न्यायपालिका में दिव्यांगजन अधिकारों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने तथा समावेशी न्याय व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments