महानगर मेट्रो न्यूज़ के सवालों के चक्रव्यूह में फंसा मास्टरमाइंड जगत पारेख; कबूला—”राज कुंद्रा का केस देखकर जैन मुनि पर लगा दिए अश्लील वीडियो के घिनौने आरोप!” अदालत और समाज को ठगने का घिनौना खेल उजागर।
सस्ते व्यूज और फिरौती का ‘डिजिटल मर्डर’
क्या इस देश में किसी की सामाजिक प्रतिष्ठा, सदियों पुरानी धार्मिक आस्था और संतों की पवित्रता इतनी सस्ती हो चुकी है कि कोई भी एरा-गेरा उठकर उस पर कीचड़ उछाल दे? ‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ आज एक ऐसी ही सनसनीखेज और रूह कंपा देने वाली साज़िश का लाइव पर्दाफाश कर रहा है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ ‘सागर समुदाय’ को ब्लैकमेल करना और उनसे मोटी रकम वसूलना था।
इस कथित गैंग का मॉडस ऑपेरंडी (काम करने का तरीका) बेहद शातिर है। ये लोग पहले आधुनिक तकनीक और एडिटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके फर्जी वीडियो और मॉर्फ्ड (झूठी) तस्वीरें तैयार करते हैं। इसके बाद शुरू होता है ब्लैकमेलिंग का गंदा धंधा। जब पीड़ित पक्ष इनकी अवैध उगाही और फिरौती के आगे नहीं झुकता, तो ये समाज में पूजनीय संतों का चरित्र हनन करने के लिए उन फर्जी पोस्ट्स को सोशल मीडिया पर वायरल कर देते हैं।
गैंग के सरगनाओं का कच्चा चिट्ठा: कौन हैं ये चेहरे?
जब इस पूरी साज़िश की कड़ियों को जोड़ा गया, तो इसके पीछे दो मुख्य चेहरे बेनकाब हुए:
1 जगत पारेख (अहमदाबाद): इस पूरी साज़िश का मुख्य स्क्रिप्टराइटर, जिस पर पहले से ही कई धोखाधड़ी (फ्रॉड) और क्रिमिनल केस दर्ज हैं। जिसकी खुद की कानून की नज़र में कोई साख नहीं है, वो समाज की साख पर हमला कर रहा था।
2 हार्दिक हुडिया (मुंबई): मुंबई की चकाचौंध में बैठकर डिजिटल आईडी के पीछे छिपने और इस पूरे ब्लैकमेलिंग नेटवर्क को खाद-पानी देने का काम इसी शख्स का है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ ने इन्हें बंद कमरों से बाहर आकर खुले मैदान में सबूत पेश करने की चुनौती दी थी, जिसके बाद जो हुआ… उसने इस पूरी गैंग के झूठ के परखच्चे उड़ा दिए।
ऑन-फोन इंटरव्यू: तीखे सवालों के आगे सरगना का आत्मसमर्पण
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ के खोजी पत्रकारों ने जब सीधे इस साज़िश के मुख्य सूत्रधार जगत पारेख को फोन पर घेरा, तो उसके पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। हमारे रिपोर्टर ने जब उससे सणसणता हुआ सीधा सवाल दागा:
“आपने कोर्ट में अर्जी देकर जैन मुनि सागरचंद्र सागर आचार्य जी पर अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने का इतना संगीन और घटिया आरोप लगाया… इसका ठोस फोरेंसिक या डिजिटल सबूत कहां है? दिखाइए!”
इस तीखे सवाल पर जगत पारेख हकबका गया। ऑन-रिकॉर्ड बातचीत में उसने जो कहा, वो कानून और न्याय व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। उसने घुटने टेकते हुए कबूल किया कि उसके पास कोई पक्का सबूत नहीं है! उसने कहा—”हमें ऐसा लगा कि शायद ऐसा हो सकता है।”
जब हमारे खोजी पत्रकार ने पूछा कि बिना सबूत के इतना घिनौना आरोप लगाने की हिम्मत कैसे हुई? तो उसका जवाब सुनिए—उसने कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री के राज कुंद्रा का अश्लील वीडियो वाला मामला मीडिया में छाया हुआ था, उसे देखकर मुझे लगा कि शायद आचार्य सागरचंद्र सागर भी ऐसा ही कुछ करते होंगे!
अदालत और समाज के साथ अक्षम्य खिलवाड़
यह सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि देश की न्याय प्रणाली का मज़ाक उड़ाना और पूरे सागर समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर लहूलुहान करने का अक्षम्य अपराध है। किसी टीवी न्यूज़ को देखकर, अपनी मानसिक विकृति और वहम के आधार पर एक तपस्वी संत पर इतना बड़ा लांछन लगा देना साफ करता है कि इस गैंग का मकसद न्याय पाना नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ ब्लैकमेलिंग के ज़रिए पैसे ऐंठना था। अदालतें सबूतों पर चलती हैं, किसी ब्लैकमेलर के घटिया अंदाज़े पर नहीं। यही वजह है कि अब इस गिरोह को कानून के शिकंजे से कोई नहीं बचा पाएगा।
महानगर मेट्रो न्यूज़ की खुली चुनौती और समाज से अपील
यह मामला बेहद गंभीर है। पैसों की हवस में अंधी हो चुकी यह गैंग समाज के लिए एक बड़ा खतरा है। जो जैन मुनि निस्वार्थ भाव से नंगे पैर विहार करते हैं, उनकी सुरक्षा पर भी ऐसे लोग पैसों के लिए हमला करवा सकते हैं। अब समय आ गया है कि पूरा जैन समाज एकजुट होकर ऐसे तत्वों का पूर्ण बहिष्कार करे। ऐसे ब्लैकमेलर्स की हरकतों के खिलाफ तुरंत पुलिस प्रशासन को इनपुट दिए जाएं ताकि इन्हें इनके सही ठिकाने—यानी जेल की कालकोठरी में भेजा जा सके।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ साफ कर देना चाहता है कि हम किसी की खोखली धमकियों या अदालती अर्जियों के पीछे छिपने वाले सियार से डरने वाले नहीं हैं। हम इस साज़िश की आखिरी कड़़ी तक जाएंगे और इस फेक फैक्ट्री को पूरी तरह नेस्तनाबूद करके रहेंगे।
ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो न्यूज़

