Homeटॉप न्यूज़साज़िश का महापर्दाफाश: सागर समुदाय को बदनाम करने वाले कथित ब्लैकमेलर्स के...

साज़िश का महापर्दाफाश: सागर समुदाय को बदनाम करने वाले कथित ब्लैकमेलर्स के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़, सबूतों के नाम पर सिर्फ अनुमान का सहारा

राज कुंद्रा केस की आड़ में जैन मुनि के खिलाफ रची गई घिनौनी साजिश, महानगर मेट्रो न्यूज़ के तीखे सवालों के आगे कथित गिरोह के सरगना ने टेके घुटने, अदालत और समाज को गुमराह करने का बड़ा खेल उजागर।

प्रस्तावना : साज़िश का खतरनाक ताना-बाना

पिछले कुछ समय से समाज की शांति और सौहार्द को बिगाड़ने के लिए एक बेहद खतरनाक और घिनौना खेल खेला जा रहा है। इस पूरी साजिश का मुख्य निशाना सागर समुदाय बना हुआ है, जिसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के लिए एक सुव्यवस्थित कथित गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिर है। सबसे पहले आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग करके फर्जी वीडियो और मॉर्फ्ड यानी झूठी तस्वीरें तैयार की जाती हैं। इसके बाद इन भ्रामक सामग्रियों को सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड करने की धमकी दी जाती है। यहीं से शुरू होता है इनका असली खेल, जो कि अवैध उगाही और फिरौती मांगने का है। जब यह कथित गिरोह पीड़ित पक्ष से फिरौती वसूलने में नाकाम रहता है, तो समाज में पूजनीय संतों और पूरे समुदाय को बदनाम करने की नीयत से उन फर्जी पोस्ट्स को वायरल कर दिया जाता है। इस पूरे कथित रैकेट के पीछे जिन चेहरों के नाम सामने आ रहे हैं, उनका खुद का रिकॉर्ड बेहद विवादास्पद रहा है।

किरदारों का कच्चा चिट्ठा

इस पूरी कथित साजिश को संचालित करने वाले चेहरों की जब पड़ताल की गई, तो इसके तार दो मुख्य किरदारों से जुड़ते नजर आए। पहला नाम है जगत पारेख का, जो अहमदाबाद का रहने वाला है। स्थानीय सूत्रों और कानूनी रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस शख्स पर पहले से ही कई तरह के फ्रॉड और क्रिमिनल केस चल रहे हैं, जिससे इसकी खुद की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े होते हैं। इस साजिश में उसका साथ दे रहा है हार्दिक हुडिया, जो मुंबई में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने में मदद कर रहा है। महानगर मेट्रो न्यूज़ ने इस कथित गिरोह को शुरू से ही खुला चैलेंज किया था कि अगर उनके पास जैन मुनि सागरचंद्र सागर आचार्य जी के खिलाफ रत्ती भर भी प्रामाणिक सबूत हैं, तो वे उन्हें सामने लाएं। बंद कमरों में बैठकर और फर्जी डिजिटल आईडी के पीछे छिपकर चरित्र हनन करना बंद किया जाए।

महानगर मेट्रो न्यूज़ का ऑन-फोन इंटरव्यू और झूठ का आत्मसमर्पण

जब इस पूरे मामले की गहराई में जाने के लिए महानगर मेट्रो न्यूज़ के खोजी पत्रकारों ने सीधे इस कथित साजिश के मुख्य सूत्रधार जगत पारेख से फोन पर संपर्क किया, तो बातचीत के दौरान जो सच सामने आया, उसने इस पूरे गिरोह के दावों की हवा निकाल दी। जगत पारेख से जब ऑन-फोन बेहद तीखे और सीधे सवाल पूछे गए कि आपने अदालत में जो केस दायर किया है, उसमें इतने संगीन आरोप लगाए हैं कि जैन मुनि सागरचंद्र सागर आचार्य कथित तौर पर अश्लील वीडियो बनाकर विदेशों में बेचते हैं, तो इस बेहद घिनौने आरोप का आधार क्या है? आपके पास क्या सबूत हैं?

इस सीधे सवाल पर जगत पारेख के पास कोई ठोस जवाब नहीं था। उसने ऑन-रिकॉर्ड बातचीत में यह स्वीकार किया कि उनके पास कोई पक्का सबूत नहीं है। उसने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि शायद ऐसा हो सकता है। जब उससे पूछा गया कि बिना सबूत के इतना बड़ा आरोप लगाने की हिम्मत उसने कैसे की, तो उसने जो तर्क दिया वह और भी ज्यादा चौंकाने वाला था। जगत पारेख ने सफाई देते हुए कहा कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े राज कुंद्रा का मामला चर्चा में था, जिन पर मोबाइल ऐप्स पर अश्लील वीडियो अपलोड करने के आरोप लगे थे। जगत पारेख के मुताबिक, उस घटना को देखकर उसे ऐसा लगा कि आचार्य सागरचंद्र सागर भी शायद ऐसा ही कोई काम करते होंगे।

अनुमान के आधार पर चरित्र हनन का घिनौना प्रयास

यह बात सोचने वाली है कि क्या देश की न्याय व्यवस्था और किसी व्यक्ति या समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा इतनी सस्ती है कि उसे सिर्फ एक मामूली अनुमान या वहम के आधार पर दांव पर लगा दिया जाए? राज कुंद्रा के मामले का उदाहरण देकर एक परम पूजनीय जैन मुनि पर इतना बड़ा लांछन लगा देना न सिर्फ कानून का मज़ाक उड़ाना है, बल्कि यह पूरे सागर समुदाय की भावनाओं को आहत करने का एक अक्षम्य अपराध है। यह साफ तौर पर अदालत को गुमराह करने और न्याय प्रणाली का समय बर्बाद करने की एक सोची-समझी साजिश है। कानूनी विशेषज्ञ भी मानते हैं कि देश की अदालतें सिर्फ और सिर्फ ठोस सबूतों पर काम करती हैं, किसी के पूर्वाग्रह या मनगढ़ंत अंदाजा लगाने की बीमारी पर नहीं। यही वजह है कि इस कथित गिरोह को अब अदालत के भीतर भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ेगा।

निष्कर्ष और हमारा संकल्प

महानगर मेट्रो न्यूज़ आज भी अपने पुराने और निष्पक्ष रुख पर पूरी तरह कायम है। हम इस कथित गिरोह को एक बार फिर खुली चुनौती देते हैं कि अगर आपके दावों में सच्चाई है, तो अदालती प्रक्रिया के पीछे छिपने के बजाय जनता के सामने सबूत पेश करें। हमारा अखबार न तो किसी तरह के सामाजिक या राजनीतिक दबाव के आगे झुकेगा और न ही ब्लैकमेलिंग करने वाले तत्वों की धमकियों से डरेगा। सागर समुदाय और उनके संतों को बदनाम करने वाली इस फेक फैक्ट्री के पीछे छिपे हर चेहरे को बेनकाब करना हमारा पत्रकारिता धर्म है। महानगर मेट्रो न्यूज़ के माध्यम से हम इस मामले की आखिरी कड़ाई तक जाएंगे और सच को पूरी शिद्दत के साथ सामने लाते रहेंगे।

ब्यूरो रिपोर्ट, महानगर मेट्रो न्यूज़

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments