Homeभारतमहाराष्ट्राहम देश को समृद्ध बनाना चाहते हैं, दुनिया उन्हीं की बात सुनती...

हम देश को समृद्ध बनाना चाहते हैं, दुनिया उन्हीं की बात सुनती है जिनके पास ताकत है, नागपुर में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि हम अपने देश को समृद्ध बनाना चाहते हैं, क्योंकि दुनिया उन्हीं की बात सुनती है जिनके पास शक्ति होती है। केवल सच होना ही काफी नहीं है, सम्मान केवल शक्ति से ही मिलता है। दुनिया ऐसी है कि शक्तिशाली लोग अपनी मर्ज़ी से काम करते हैं।

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि हम अपने देश को समृद्ध बनाना चाहते हैं, क्योंकि दुनिया उन्हीं की बात सुनती है जिनके पास शक्ति होती है। केवल सच होना ही काफी नहीं है, सम्मान केवल शक्ति से ही मिलता है। दुनिया ऐसी है कि शक्तिशाली लोग अपनी मर्ज़ी से काम करते हैं। जबकि कमजोरों को झुकना पड़ता है। चाहे वह किसी देश को जीतना हो। बम गिराना हो या तेल की सप्लाई रोकना हो। यह सब शक्ति के कारण ही होता है। फिर भी भारत का लक्ष्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं। बल्कि सबका मार्गदर्शन करना और सबको सहारा देना है। और जब भारत अपने सिद्धांतों पर मजबूती से खड़ा होगा। जिसका नेतृत्व समाज को गढ़ने वाले सदाचारी लोग करेंगे। तो वह दुनिया को एक नया रास्ता दिखाएगा। यह रास्ता प्रभुत्व के ज़रिए नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक रूप से समर्पित राष्ट्र के तौर पर धर्म का प्रसार करके दिखाया जाएगा।

कहां बोले संघ प्रमुख?

नागपुर में आरएसएस के स्वयंसेवी प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया मानव शरीर, मन और बुद्धि का अलग-अलग विकास करना जानती है, लेकिन वह एक ऐसा ढांचा विकसित करने में विफल रही है, जो इन तीनों का एक साथ विकास कर सके। उन्होंने कहा कि दुनिया मानव शरीर के विकास के साथ-साथ मन और बुद्धि के विकास को भी जानती है। लेकिन दुनिया यह नहीं जानती कि इन तीनों मोर्चों पर प्रगति कैसे हासिल की जाए।

दुनिया में चल रहे संघर्षों का जिक्र

मौजूदा वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि इनका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जो सीधे तौर पर इनमें शामिल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है, लेकिन भारत में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि लोग अक्सर चुनौतियों और अनिश्चितताओं पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन उन्हें ऐसी कठिन परिस्थितियों में मौजूद अवसरों को भी पहचानना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया व्यक्तिगत अधिकारों, सामाजिक हितों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अब भी दुविधाओं में फंसी हुई है।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर भी बोले

भागवत ने कहा कि किसी व्यक्ति को व्यक्तिगत अधिकार देने से समाज के हित से समझौता होता है। यदि समाज को शक्तियां दी जानी आवश्यक हों, तो व्यक्ति के अधिकारों का दमन होता है। संघ प्रमुख ने पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भौतिक विकास अक्सर प्रकृति की कीमत पर किया जाता है, जबकि पर्यावरण संरक्षण को अक्सर विकास में बाधा के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि भौतिकवादी विकास के लिए पर्यावरण का शोषण किया जाता है। और पर्यावरण की रक्षा के लिए (कुछ लोग मांग करते हैं कि) विकास रोक दिया जाए। दुनिया इस तरह के मुद्दों में फंसी हुई है और भ्रमित है।

भारत का समय आ गया है-भागवत

भागवत ने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है, जो एक साथ सुख, शांति और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित कर सके। उन्होंने कहा कि सिद्धांतों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों में समाधान मौजूद हो सकते हैं, लेकिन मानवीय आदतों और सीमाओं के कारण उनका कार्यान्वयन कठिन बना रहता है। भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि प्रभावी कार्रवाई के लिए शरीर, मन और बुद्धि के बीच समन्वय आवश्यक है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि अब भारत का समय आ गया है, क्योंकि दुनिया संघर्ष-आधारित और स्वार्थी विकास मॉडल के विकल्प तलाश रही है।

आर्थिक शक्ति में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है भारत

संघ प्रमुख ने दावा किया कि भारत ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, विज्ञान और आर्थिक शक्ति में दुनिया का नेतृत्व करता रहा है और वर्तमान ज्ञान की कई बुनियादें इसी देश से जुड़ी हुई हैं। भागवत ने कहा कि समय के साथ भुला दिए गए मूल्यों और शक्तियों को पुनः प्राप्त किया जाना चाहिए। उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments