विशेष प्रतिनिधि, नागदा | महानगर मेट्रो : जैन समाज और स्थानीय हलकों में चल रहा आंतरिक विवाद अब पूरी तरह खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर आ गया है। नागदा के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अभय चोपड़ा ने ‘जगत’ नामक व्यक्ति पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चोपड़ा ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बिना हाथ-पैर और सबूतों के मनगढ़ंत कहानियां गढ़ना बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि समाज ऐसी हरकतों से गुमराह और परेशान हो रहा है।
“ला ग्रेजुएट हूँ, बच्चों जैसी हरकतें बंद करें”
अभय चोपड़ा ने अपने सार्वजनिक बयान में तीखे लहजे में कहा, “मैंने फोन पर भी पूछा था और आज फिर कह रहा हूँ कि मैं एक ‘ला ग्रेजुएट’ (कानून स्नातक) हूँ, जबकि आपकी हरकतें चौथी-पांचवीं के छात्र जैसी हैं। ऐसा लगता है कि बचपन में आपने जासूसी उपन्यास बहुत ज्यादा पढ़ लिए हैं, जिसकी नकल में आप आए दिन बिना किसी सिर-पैर और सबूत के नई कहानियां सोशल मीडिया पर लेकर आ जाते हैं। आपको रात में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर रोज सपने आते हैं।”
गच्छ विवाद और करोड़ों के दावों पर घेरा
विवाद की परतों को खोलते हुए चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन ‘अखिल भारतीय हिंदू जैन साधु संत रक्षा समिति’ पूरी तरह पारदर्शी है। उन्होंने जगत पर निशाना साधते हुए कहा कि चोरों को सब चोर ही नजर आते हैं। करोड़ों रुपये ऐंठने के जो सपने देखे जा रहे थे, उन्हें पूरा नहीं होने दिया गया। कोर्ट-कचहरी के मामलों पर बोलते हुए उन्होंने आगाह किया कि केस अभी अन-रजिस्टर (Un-registered) है और वकील सिर्फ गुमराह कर रहे हैं।
बयान के मुख्य और कड़े प्रहार:
जासूसी उपन्यासों की नकल: बिना सबूत और तथ्यों के सोशल मीडिया पर रोजाना नई कहानियां गढ़ने का आरोप।
चारित्र्य का फर्जी सर्टिफिकेट: आरोप लगाया कि सामने वाला व्यक्ति खुद को हर किसी के चरित्र का प्रमाण पत्र देने वाली यूनिवर्सिटी का ‘भ्रष्ट कुलपति’ समझ बैठा है।
समाज को परेशान करने का धंधा: कम ज्ञान और कम अक्ल वाले लोग खुद को बुद्धिमान मानकर पूरे समाज को संकट में डाल रहे हैं।
महानगर मेट्रो का नजरिया: “कम अक्ल और कम ज्ञान समाज के लिए घातक”
अभय चोपड़ा ने अपने बयान के अंत में एक बेहद गंभीर और कड़वी बात कही है, जो आज के सोशल मीडिया युग पर सटीक बैठती है। उन्होंने कहा कि जब कम अक्ल, कम ज्ञान और कम पढ़ाई वाला व्यक्ति खुद को सबसे बड़ा बुद्धिमान समझने लगता है, तो वह खुद भी परेशान होता है और पूरे समाज को भी मानसिक रूप से परेशान करता है। समाज को ऐसे ‘स्वयंभू जासूसों’ से सावधान रहने की जरूरत है।

