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दुर्गम राहें भी न डिगा सकीं हौसलाः तहसीलदार नीरजा कुमारी ने अरावली की पहाड़ियों को लांघकर लोयाणागढ़ किले में की जनगणना

जालोर (मुकेश सोलंकी)। प्रशासनिक निष्ठा और कर्तव्यपरायणता जब मजबूत इरादों से मिलती है, तो दुर्गम रास्ते भी सुगम हो जाते हैं। ऐसा ही एक मिसाल जालोर जिले के जसवंतपुरा में देखने को मिली, जहां तहसीलदार नीरजा कुमारी ने अरावली की दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित ऐतिहासिक लोयाणागढ़ किले में स्वयं पहुंचकर जनगणना और भवन गणना के कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

चुनौतियों को मात देकर तय किया सफर

लोयाणागढ़ किला अरावली की ऊंची और पथरीली पहाड़ियों के बीच स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहर है। इस किले तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नहीं है। प्रशासनिक टीम को वहां तक पहुंचने के लिए लगभग 10 से 12 किलोमीटर लंबा, ऊबड़-खाबड़, कंटीला और पथरीला मार्ग पैदल ही तय करना था। इस कठिन चढ़ाई को पार करना किसी चुनौती से कम नहीं था।

चर्चा से बनी कार्ययोजना

जनगणना अभियान की समीक्षा के दौरान जब इस ऐतिहासिक और सुदूर क्षेत्र में गणना को लेकर चर्चा शुरू हुई, तब तहसील रीडर गणपतदान चारण ने किले के गौरवशाली इतिहास और उसकी भौगोलिक स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद क्षेत्र के पूर्व विधायक नारायण सिंह, ठाकुर पूरणसिंह और ठाकुर मनोहर सिंह ने सुझाव दिया कि इस ऐतिहासिक स्थल की महत्ता को देखते हुए यदि तहसीलदार स्वयं वहां जाएं, तो टीम का मनोबल बढ़ेगा। तहसीलदार नीरजा कुमारी ने इस चुनौती को सहर्ष स्वीकार किया।

राजस्व, वन विभाग और जनगणना टीम का संयुक्त अभियान

तय रणनीति के तहत तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग, वन विभाग और जनगणना विभाग की संयुक्त टीम ने चढ़ाई शुरू की। तपती धूप और पथरीले रास्तों की परवाह न करते हुए पूरी टीम किले पर पहुंची। वहां पहुंचकर नियमों के अनुसार भवनों पर निशान लगाए गए और वहां रह रहे परिवारों की गणना का कार्य पूरी विधिक प्रक्रिया के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान प्रगणक संजय कुमार,मूलाराम,जनगणना टीम से विनोद,दीपचंद, राजस्व विभाग से जोगेंद्र सिंह,गणपतदान,ओमप्रकाश, राकेश,रेखा मीना,राम नरेश, भूराराम,ईश्वर सेन, वन विभाग से देवी सिंह,ओम, और प्रभु सहित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे ।

क्षेत्र में हो रही है सराहना

एक महिला प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इस तरह के बेहद कठिन और दुर्गम क्षेत्र में स्वयं जाकर मोर्चा संभालने की खबर जैसे ही नीचे आई, स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध जनों ने उनकी जमकर सराहना की। लोगों का कहना है कि तहसीलदार नीरजा कुमारी का यह कदम न केवल प्रशासनिक सेवा के प्रति उनकी गहरी जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि यह हमारी ऐतिहासिक धरोहरों और वहां रहने वाले नागरिकों के प्रति सम्मान का एक अनूठा उदाहरण भी है।

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