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महानगर मेट्रो एक्सक्लूसिव : धर्म के नाम पर महापाप: मुनिश्री को फंसाने के लिए रचा गया ‘हनीट्रैप’ का घिनौना खेल, सफेदपोश ब्लैकमेलर्स बेनकाब!

महानगर मेट्रो एक्सक्लूसिव : पवन माकन अहमदाबाद : गुजरात की पावन धरती पर धर्म और आस्था के सीने में खंजर घोंपने वाली एक खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है। जैन मुनि राजतिलक सागरजी महाराज को ‘हनीट्रैप’ के गंदे जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठने की कोशिश की गई है। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और साधु-संतों की साख पर एक ‘ब्लैकमेलिंग माफिया’ का सीधा और वीभत्स हमला है।

जांच की आंच जैसे-जैसे तेज हो रही है, समाज के ठेकेदार बने इन सफेदपोश भेड़ियों की खाल उतरनी शुरू हो गई है।

साजिश के खौफनाक पन्ने: ऐसे बुना गया पाप का जाल

महिला को मोहरा बना रची ब्लैकमेलिंग:* किरण दोषी और उसके गुर्गों ने एक लाचार महिला को ढाल बनाकर मुनिश्री की वर्षों की तपस्या को चंद घंटों में नीलाम करने की घिनौनी पटकथा लिखी। इनका मकसद सिर्फ करोड़ों की फिरौती वसूलना था।

शुरू की कैरेक्टर असैसिनेशन की फैक्ट्री:* जब संतों ने इस ‘ठग सिंडिकेट’ की गीदड़-भभकियों के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया, तो सोशल मीडिया और अदालती दांव-पेचों के जरिए मुनिश्री के चरित्र हनन (पब्लिक मर्डर) का गंदा खेल शुरू किया गया।

धर्म के चोले में छिपे ‘आस्तीन के सांप’:* इस दलदल में हार्दिक हुडिया, जगत पारेख, विक्रम सिंघवी और विक्रम बाफना जैसे नाम सामने आए हैं। खुद को ‘श्रावक’ बताने वाले ये वही गद्दार हैं, जिन्होंने शासन सेवा का मुखौटा पहनकर अंदर ही अंदर धर्म को खोखला करने की जुर्रत की है।

सणसणते सवाल: जो सत्ता और समाज की रूह कंपा देंगे!

1 अदृश्य आका कौन?:* इन प्यादों को करोड़ों की फिरौती मांगने की ताकत देने वाला वह ‘असली मास्टरमाइंड’ किस आलीशान बंगले में बैठकर यह खेल ऑपरेट कर रहा है?
2 क्या पुलिस दिखाएगी दम?:* क्या गुजरात पुलिस इन रसूखदार ‘धर्म-द्रोहियों’ का कॉलर पकड़कर इन्हें जेल की चक्की पीसने पर मजबूर करेगी या ‘सेटिंग’ के नाम पर फाइलें दबा दी जाएंगी?
3 समाज का बहिष्कार:* क्या जैन समाज इन आस्तीन के सांपों का हुक्का-पानी बंद कर इन्हें बीच चौराहे पर बेनकाब करने का साहस दिखाएगा?

अंतिम ललकार: पाप का घड़ा भर चुका है!

साधु की साख से खेलने वालों की तिजोरियां चाहे कितनी भी भारी हों, कानून का हंटर और कुदरत का न्याय उन्हें राख कर देगा। यह लेखनी तब तक शांत नहीं होगी, जब तक एक-एक गद्दार सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता। असली चेहरों के नकाब तो अभी फटने शुरू हुए हैं… महाविस्फोट की अगली कड़ी के लिए तैयार रहिए!

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