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प्रदूषण को लेकर बढ़ा विवाद पेपर मिल और पेट फूड कंपनी पर उठे सवाल

शिवनाथ नदी में दूषित पानी छोड़ने का आरोप, ग्रामीणों में आक्रोश : जिला पंचायत सदस्य विभा साहू ने उठाई आवाज, कंपनियों को दी चेतावनी प्रदूषण रोको, वरना होगी उच्च स्तरीय शिकायत

हेमंत वर्मा संवाददाता राजनांदगांव : जिले में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। शिवनाथ नदी में औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जा रहे दूषित पानी से आसपास के गांवों के लोग परेशान हैं। इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने कड़ा रुख अपनाया है जिससे प्रशासन और संबंधित कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है।

जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 5 अर्जुनी की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विभा साहू ने झींका स्थित धनलक्ष्मी पेपर मिल को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कंपनी का गंदा पानी सीधे शिवनाथ नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। इससे ग्राम सुखरी, बरसनटोला और अन्य निचले क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नदी का पानी उपयोग योग्य नहीं रह गया है पशुओं के पीने के लिए भी असुरक्षित हो चुका है दूषित पानी से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है भूजल स्तर भी प्रभावित हो रहा है ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर गहरा आक्रोश है।

श्रीमती साहू ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा है कि यदि कंपनी द्वारा दूषित पानी के प्रबंधन की उचित व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीणों द्वारा उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई जाएगी जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी की होगी। इस मामले में ढुल्स पेट फूड प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राम पंचायत सुखरी के पत्र का जवाब देते हुए कहा है कि कंपनी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए प्रयोग किए गए पानी को नाली में बहाने की प्रक्रिया रोक दी है भविष्य में भी दूषित पानी नहीं छोड़ा जाएगा इसका आश्वासन दिया गया है बारिश के पानी के उचित निकास के लिए ग्राम पंचायत से सहयोग मांगा गया है स्थानीय कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करने की बात भी कही गई है

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का औद्योगिक प्रदूषण न केवल जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाता है बल्कि जलजनित बीमारियों को बढ़ावा देता है कृषि और पशुपालन पर असर डालता है लंबे समय में पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचा सकता है अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और कंपनियां अपने वादों पर कितना अमल करती हैं। ग्रामीणों की नजर अब ठोस समाधान पर टिकी है। राजनांदगांव में यह मामला सिर्फ एक स्थानीय समस्या नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट और गहरा सकता है।

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