गांधीनगर : गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी के ‘सख्त पुलिसिंग’ और अपराधियों के जुलूस निकालने वाले मॉडल का अनुसरण करना अब पुलिस महकमे के लिए गले की फांस बन गया है। सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने के चक्कर में ‘After-Before’ (अपराध से पहले और गिरफ्तारी के बाद की तस्वीरें) वीडियो बनाने वाली पुलिस खुद कानूनी घेरे में आ गई है। मर्यादा लांघने के आरोप में अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ ही मामला दर्ज होने से महकमे में हड़कंप मच गया है।
पब्लिसिटी की भूख या कानून का उल्लंघन?
गृह मंत्री हर्ष संघवी अक्सर अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए पुलिस की ‘रील्स’ और ‘वीडियो’ को प्रोत्साहित करते रहे हैं। इसी ‘रवाड़े’ (नक्शेकदम) पर चलते हुए कुछ उत्साहित पुलिस अधिकारियों ने मानवाधिकारों और अदालती दिशा-निर्देशों को ताक पर रख दिया। आरोपियों को सरेआम बेइज्जत करने और उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की होड़ ने पुलिस को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है।
जब रक्षक ही बन गए भक्षक
सूत्रों के अनुसार, एक विशिष्ट मामले में पुलिस ने आरोपी की गरिमा को ठेस पहुंचाते हुए उसका ‘After-Before’ वीडियो बनाकर वायरल किया था। इस मामले में न्यायालय और उच्चाधिकारियों के कड़े रुख के बाद, संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है।
घटना के मुख्य बिंदु
नियमों की अनदेखी: कानून के मुताबिक, सजा तय करना कोर्ट का काम है, लेकिन पुलिस सोशल मीडिया पर ‘सिंघम’ बनने की कोशिश में खुद जज बन बैठी।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग: सरकारी वर्दी में रील बनाना और आरोपियों के साथ दुर्व्यवहार को ‘शौर्य’ के रूप में पेश करना भारी पड़ा।
कोर्ट की फटकार: मानवाधिकारों के हनन को लेकर कोर्ट ने पहले भी कई बार ऐसी गतिविधियों पर नाराजगी जाहिर की थी।
विपक्ष का तंज: “रील वाली सरकार, मुश्किल में थानेदार”
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष का कहना है कि गृह मंत्री केवल पब्लिसिटी वाली पुलिसिंग चाहते हैं, जिसका खामियाजा अब जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों को भुगतना पड़ रहा है।
महानगर मेट्रो का कड़ा रुख:
पुलिस का काम अपराध रोकना और अपराधी को सलाखों तक पहुँचाना है, न कि वीडियो एडिटर बनकर सोशल मीडिया पर लाइक बटोरना। हर्ष संघवी के ‘जोश’ को ‘होश’ के साथ लागू न करने का नतीजा आज खाकी पर दाग बनकर लगा है।

