Homeआर्टिकलनिस्वार्थ प्रेम : जहाँ भावनाएं 'सवाल' नहीं, 'संबल' होती हैं

निस्वार्थ प्रेम : जहाँ भावनाएं ‘सवाल’ नहीं, ‘संबल’ होती हैं

लेख : पवन माकन : आज के इस दौर में जहाँ हर रिश्ता किसी न किसी ज़रूरत या मतलब की बुनियाद पर टिका नज़र आता है, वहाँ ‘निस्वार्थ प्रेम’ की परिभाषा कहीं खो सी गई है। अक्सर हम जिसे अपना मानकर अपना सर्वस्व और अपनी चिंताएं समर्पित कर देते हैं, सामने वाला उसे प्रेम के बजाय ‘पाबंदी’ या ‘सवाल’ समझने लगता है।

सच्चाई तो यह है कि “मैंने तुम्हें स्वार्थ के लिए प्यार नहीं किया!” चिंता शंका नहीं, साथ है

जब कोई व्यक्ति आपकी हर पल चिंता करता है, तो वह आप पर शक नहीं कर रहा होता, बल्कि वह आपके साथ खड़ा होने का अहसास दिला रहा होता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर इंसान व्यस्त है। समय किसी के पास नहीं है, लेकिन उस व्यस्तता के बीच भी कोई आपके लिए कितने ‘Efforts’ (प्रयास) लगाता है, यही एक सच्चे संबंध की असली पहचान है।

डिजिटल दौर और धड़कता अहसास

आजकल की तकनीक के युग में चाहे ‘Live Location’ साझा करना हो या एक-दूसरे की गतिविधियों से जुड़े रहना, यह जासूसी नहीं बल्कि एक-दूसरे के प्रति फिक्र का हिस्सा है। यह एक ऐसी आदत है जो बताती है कि कोई हृदय आपके लिए हर पल धड़क रहा है। लेकिन विडंबना देखिए, जब समर्पण गहरा होता है, तो अक्सर उसे ‘सवाल’ का नाम दे दिया जाता है।

निष्कर्ष

प्रेम का अर्थ अधिकार जताना नहीं, बल्कि एक अटूट विश्वास और साथ देना है। अगर मेरी हर भावना तुम्हें एक सवाल लगती है, तो शायद कमी मेरे प्रेम में नहीं, बल्कि उसे समझने के नज़रिए में है। प्रेम स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि उम्र भर के साथ के लिए किया जाता है।

हमें यह समझने की ज़रूरत है कि जो व्यक्ति आपके लिए समय निकालता है और आपकी फिक्र करता है, वह दुनिया का सबसे कीमती इंसान है। भावनाओं को सवालों के घेरे में खड़ा करने के बजाय, उन्हें समझने की कोशिश करें।

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