फेक वीडियो विवाद : IPS अजय पाल शर्मा की छवि खराब करने के आरोप में TMC सांसद के खिलाफ दिल्ली में शिकायत दर्ज
नई दिल्ली/ब्यूरो : डिजिटल क्रांति के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब चुनाव को प्रभावित करने का सबसे खतरनाक हथियार बनता जा रहा है। ताजा मामला तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रांड सांसद महुआ मोइत्रा से जुड़ा है। यूपी के चर्चित IPS अधिकारी और ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अजय पाल शर्मा के एक तथाकथित वीडियो को साझा करने के मामले में महुआ मोइत्रा के खिलाफ दिल्ली में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है।
क्या है पूरा विवाद?
सोशल मीडिया पर हाल ही में कुछ वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें दावा किया गया था कि IPS अजय पाल शर्मा किसी राजनीतिक दल के उम्मीदवार को चेतावनी दे रहे हैं। इसी वीडियो को सांसद महुआ मोइत्रा ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से साझा किया था। अब इस वीडियो की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत में किए गए बड़े दावे : दिल्ली में दर्ज कराई गई शिकायत में आरोपों की फेहरिस्त लंबी है। आवेदक ने दावा किया है कि:
डीपफेक टेक्नोलॉजी का खेल: वायरल वीडियो असली नहीं, बल्कि AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा तैयार किया गया ‘फेक वीडियो’ हो सकता है।
छवि धूमिल करने की साजिश: IPS अजय पाल शर्मा की कर्तव्यनिष्ठ छवि को नुकसान पहुंचाने और उन्हें राजनीतिक विवादों में घसीटने का प्रयास किया गया है।
चुनावी माहौल को प्रभावित करना: आरोप है कि जनता के मन में भ्रम पैदा करने और चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित करने के लिए सुनियोजित तरीके से गलत जानकारी फैलाई गई है।
टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग और लोकतंत्र का खतरा
जानकारों का मानना है कि ‘फेक वीडियो’ और ‘डीपफेक’ तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज और चेहरे का इस्तेमाल करके उसे कुछ भी बोलते हुए दिखाया जा सकता है। चुनाव के समय ऐसे वीडियो न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि यह मतदाताओं को गुमराह करने का भी बड़ा जरिया बन रहे हैं।
“महानगर मेट्रो का नजरिया:”
डिजिटल युग में किसी भी वीडियो या सूचना को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अनिवार्य है। यदि एक जन-प्रतिनिधि ही बिना जांचे ‘AI जेनरेटेड’ सामग्री फैलाता है, तो इसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय होनी चाहिए। कानून को यह स्पष्ट करना होगा कि क्या यह केवल एक तकनीकी गलती है या किसी की छवि बिगाड़ने की गहरी साजिश?

