सितंबर तिमाही में एफएमसीजी सेक्टर की सेल्स ग्रोथ में गिरावट आई है। छोटी कंपनियों पर ज्यादा मार पड़ी है जबकि बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन अच्छा रहा है। स्टॉक्स, पैकेजिंग मटीरियल्स और कर्मशियल गैस की शॉर्टेज ने छोटी कंपनियों को ज्यादा प्रभावित किया है।
नई दिल्ली: फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (FMCG) सेक्टर के लिए सितंबर तिमाही अच्छी नहीं रही है। रूरल डिमांड में सुस्ती और बढ़ती लागत के कारण छोटी कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ में गिरावट आई है। हालांकि इस दौरान बड़ी लिस्टेड कंपनियों ने मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इस तिमाही के दौरान एफएमसीजी सेक्टर का सेल्स वॉल्यूम सितंबर तिमाही के दौरान 3.6% रहा जो एक साल पहले समान तिमाही में 4.7% था।
हालांकि इस दौरान बड़ी लिस्टेड एफएमसीजी कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। Worldpanel by Numerator के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। हिंदुस्तान यूनिलीवर की वॉल्यूम ग्रोथ 7% रही जबकि मैरिको का बिजनेस 10% बढ़ा। गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 8% उछल गई जबकि नेस्ले इंडिया की वॉल्यूम ग्रोथ डबल डिजिट में रही।
रूरल मार्केट में ज्यादा दबाव
पारले प्रोडक्ट्स में वाइस प्रेजिडेंट मयंक शाह ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि अधिकांश कैटगरी में छोटी कंपनियां बड़ी कंपनियों के हाथों अपना आधार खो रही हैं। खासकर रूरल मार्केट्स में ज्यादा प्रेशर हैं जहां ज्यादातर छोटी कंपनियां ऑपरेट करती हैं। बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटी कंपनियां के पास कम संसाधन होते हैं। यही वजह है कि उनके पास लागत में बढ़ोतरी या सप्लाई की बाधा से निपटने की कम क्षमता होती है।
शाह ने साथ ही कहा कि पिछले साल जीएसटी दरों में कटौती के बाद छोटी कंपनियों ने कुछ ही दिनों में दो महीने की इंवेंट्री निपटा दी थी। इस कारण तुलना के लिए हाई बेस बन गया। Worldpanel ब्रांडेड और अनब्रांडेड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर नजर रखती है। इनमें लूज आइटम्स भी शामिल हैं। इससे खपत के बारे में व्यापक जानकारी मिलती है।
FMCG सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ
श्रेणी
जुलाई-सितंबर 2026
जुलाई-सितंबर 2025
अप्रैल-जून 2026
एफएमसीजी 3.6% 4.7% 5.2%
पर्सनल केयर 3.0% 4.4% 3.0%
होम केयर 4.0% 6.1% 5.4%
खाद्य एवं पेय पदार्थ 3.5% 4.4% 5.4%
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में FMCG ग्रोथ
क्षेत्र
जुलाई-सितंबर 2026
जुलाई-सितंबर 2025
अप्रैल-जून 2026
शहरी 3.5% 5.2% 5.2%
ग्रामीण 3.6% 4.2% 5.3%
क्या रही वजह?
मैरिको के एमडी सौगत गुप्ता ने कहा कि महंगाई और सप्लाई चेन की बाधाओं से बड़ी कंपनियों को फायदा हुआ है जबकि छोटी और रीजनल कंपनियों का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि अमूमन मुश्किल समय में छोटी और रीजनल कंपनियां को नुकसान होता है और बड़ी कंपनियों को फायदा होता है। स्टॉक्स, पैकेजिंग मटीरियल्स और कर्मशियल गैस की शॉर्टेज ने छोटी कंपनियों को ज्यादा प्रभावित किया है।

