टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक एक मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जज के सामने अंडरवियर में ही बैठ गए हैं। इस लेकर कोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी किया है। साथ ही संबंधित अधिकारी पर राज्य सरकार को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
हाइलाइट्स
मध्य प्रदेश में टीएंडसीपी के अधिकारी की बड़ी लापरवाही
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कैमरे के सामने अंडरवियर में बैठ
एकलपीठ ने अनुचित वेशभूषा मानते हुए नोटिस जारी किया
राज्य सरकार को भी चार सप्ताह के अंदर कार्रवाई के निर्देश दिए
जबलपुर: संचालक नगर एवं ग्राम निवेश भोपाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हाईकोर्ट जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ के समक्ष उपस्थित हुए। इस दौरान वह बिस्तर में लेटकर अपनी शर्ट के बटन बंद करते हुए अंडरवियर में दिखाई दिए। एकलपीठ ने अनुचित वेशभूषा में उपस्थित पर संबंधित अधिकारी को अवमानना नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। एकलपीठ ने राज्य सरकार को संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी जारी किए हैं।
ये था पूरा मामला
दरअसल, मेसर्स जी.एस.बी कंस्ट्रक्शन की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर के गोरखपुर स्थित भूमि उपयोग के मद परिवर्तन को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि संबंधित जमीन को मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्र के रूप में निर्धारित किया गया था लेकिन गलती से औद्योगिक भूमि दर्ज कर दिया गया था। भूमि के नक्शे और प्रकृति में सुधार की अनुशंसा 3 अक्टूबर 2025 को ही जबलपुर से भोपाल स्थित विभागीय कार्यालय भेजी जा चुकी थी।
आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की याचिका
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को एएलपीएएसएस पोर्टल के माध्यम से सुधार आवेदन देने का निर्देश दिए थे। एमपी हाईकोर्ट ने संयुक्त संचालक आईटी विभाग को सात दिनों के भीतर आवेदन अपलोड कराने और स्वीकार कराने में सहायता करते हुए चार सप्ताह के निर्णय लेने के आदेश जारी किए थे। आदेश का पालन नहीं होने के कारण उक्त अवमानना याचिका दायर की गयी थी।
अधिकारी को उपस्थित होने के दिए थे निर्देश
एमपी हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए संबंधित अधिकारी को अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। रिपोर्ट पेश नहीं करने पर उपस्थित रहने के आदेश जारी किये थे। याचिका पर सुनवाई के दौरान संयुक्त संचालक अमित कुमार गजभिये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उक्त वेशभूषा में उपस्थित हुए।
आचरण के खिलाफ माना
एकलपीठ ने उनके आचरण को अदालती मर्यादा के विपरीत मानते हुए एमपी सरकार को संबंधित अधिकारी के विरुद्ध उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए हैं। एकलपीठ ने संबंधित अधिकारी को अपराधिक अवमानना कार्रवाई प्रारंभ करने के संबंध में नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

