अफगानिस्तान-दिल्ली-राजस्थान कनेक्शन और बदनाम ‘टिफेल’ का काला इतिहास: सेंट्रल एजेंसियां अहमदाबाद पहुंचीं!
रामोल टोल प्लाजा से करीब 7 kg नारकोटिक्स के साथ तीन आरोपी गिरफ्तार: राजकोट माफिया तक पहुंच रहे तार, पूरे देश में फैल रहे!
अहमदाबाद : सूरत और अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की जॉइंट टीम ने गुजरात को बर्बाद करने की कोशिश कर रहे इंटरनेशनल और इंटरस्टेट ड्रग माफिया के नापाक ठिकानों पर अब तक का सबसे खतरनाक हमला किया है। अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर रामोल पुलिस स्टेशन के तहत CTM टोल प्लाजा से गुजर रही एक संदिग्ध XUV कार से करीब ₹25 से 26 करोड़ की हेरोइन और MD ड्रग्स जब्त की गई हैं। इस खुलासे के बाद सिक्योरिटी एजेंसियों में हलचल मच गई है और सेंट्रल एजेंसियों ने भी अहमदाबाद में डेरा डाल लिया है।
कितनी मात्रा में जब्त की गई? ड्रग्स का पूरा काला गणित
जॉइंट ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने कार को चारों तरफ से घेर लिया और गिरफ्तार लोगों से ये ज़ब्त किया:
4.53 kg हेरोइन (अनुमानित कीमत लगभग ₹22.65 करोड़)
2.49 kg मेफेड्रोन (MD ड्रग्स) (अनुमानित कीमत लगभग ₹2.99 करोड़)
कुल 7 kg से ज़्यादा बहुत नुकसानदायक मात्रा ज़ब्त की गई है। ये ड्रग्स गुजरात के अलग-अलग शहरों, खासकर राजकोट में एक बदनाम आदमी ‘असलम’ को डिलीवर किए जाने थे।
कुख्यात आरोपी ‘टिफेल’ का काला इतिहास: वो पहले भी करोड़ों के केस में पकड़ा जा चुका है!
इस रैकेट में पकड़े गए मुख्य आरोपियों में से एक टिफेल नोखेज (उम्र 44, निवासी नई दिल्ली) है, जो कोई आम क्रिमिनल नहीं बल्कि इंटरनेशनल ड्रग्स सेटअप का एक सीरियस प्लेयर है। जांच में पता चला है कि यही टिफेल पहले भी अमृतसर में 2014 में 100 ग्राम हेरोइन और 2019 में आधा… 300 किलोग्राम हेरोइन की स्मगलिंग या पायलटिंग जैसे बहुत गंभीर अपराधों में पकड़ा जा चुका है! इन अपराधियों की लापरवाही साबित करती है कि देश भर में फैला यह नेटवर्क कितना खतरनाक है।
अफगानिस्तान से पंजाब बॉर्डर और ड्रोन के ज़रिए कनेक्शन!
शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि इन ड्रग्स का सोर्स अफगानिस्तान के कंधार इलाके से जुड़ा है। अफगानिस्तान से ये सामान हैंडलर भेजते हैं और पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन के ज़रिए बॉर्डर पार भारत में स्मगल किया जाता है। इस सिंडिकेट के तार राजस्थान (भवई मंडी का शकील मोहम्मद), मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक फैले हुए हैं। आरोपी पुलिस की निगरानी से बचने के लिए ‘ज़ंगी’ जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल करके संपर्क में रहते थे और गाड़ियों में खास छिपे हुए डिब्बे बनाकर इस ज़हर की स्मगलिंग करते थे। सेंट्रल एजेंसियों की एंट्री और लोकल लेवल पर उथल-पुथल
यह मामला सिर्फ़ गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी का मामला बन गया है, जिसके बाद सेंट्रल एजेंसियां अहमदाबाद पहुंच गई हैं और गहरी जांच शुरू कर दी है। अहमदाबाद के जुहापुरा, फतेवाड़ी, सरखेज, रामोल, निकोल और सिंधुभवन रोड जैसे इलाकों में इस नेटवर्क के लिंक और कौन से लोकल पेडलर यह माल लेने वाले थे, इसका पता लगाया जा रहा है। पुलिस के हाथ लगी डायरी से कई बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
इस बड़े ड्रग रैकेट के खुलासे से गुजरात और पूरे देश में ड्रग पेडलरों में भूचाल आ गया है, और कई अंडरग्राउंड हो गए हैं। देखना होगा कि एजेंसियां पूरी चेन के मुख्य मास्टरमाइंड तक पहुंचने में कितनी कामयाब होती हैं!

