आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ ने मध्य प्रदेश सरकार की भावांतर भुगतान योजना को खारिज कर दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीकेएस ने मांग की है कि सरकार बाजार और समर्थन मूल्य के अंतर की भरपाई करने के बजाय सोयाबीन, धान, मक्का जैसी सभी खरीफ फसलों की 100 प्रतिशत खरीद MSP पर सुनिश्चित करे।
भोपाल: राजधानी में किसान संगठनों का पारा चढ़ता नजर आ रहा है। आरएसएस से जुड़े भारतीय किसान संघ ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य सरकार की बहुचर्चित भावांतर भुगतान योजना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में मांग की है कि सरकार किसानों को बाजार भाव और समर्थन मूल्य के अंतर का मुआवजा देने के बजाय, उनकी संपूर्ण उपज यानी 100 फीसदी खरीफ फसलों की खरीद सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करे।
खरीफ फसलों पर तय एमएसपी देने की कही बात
भोपाल में मीडिया से बातचीत करते हुए बीकेएस के राज्य अध्यक्ष कमल सिंह अंजना ने कहा कि किसानों को उनकी पूरी फसल का तयशुदा एमएसपी मिलना चाहिए। सरकार को भावांतर योजना के भरोसे बैठने के बजाय सोयाबीन, धान, मक्का, बाजरा, मूंग, उड़द और मूंगफली जैसी सभी प्रमुख फसलों की सौ फीसदी सरकारी खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।
सूखे की मार और फसल नुकसान का फिजिकल सर्वे
बीकेएस ने राज्य के उन जिलों में तुरंत सूखा घोषित करने की मांग उठाई है जहां इस सीजन में पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। संगठन का कहना है कि पानी की कमी और फसल बर्बाद होने की मार झेल रहे किसानों को विशेष राहत पैकेज दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, सैटेलाइट आधारित फसल-नुकसान के आकलन पर सवाल उठाते हुए मांग की गई है कि खरीफ सीजन के दौरान कम या ज्यादा बारिश से हुए नुकसान का जमीनी स्तर पर फिजिकल सर्वे कराया जाए, ताकि प्रभावित किसानों को तुरंत मुआवजा और फसल बीमा क्लेम का लाभ मिल सके।
बिजली, डीएपी खाद और मंडियों का मुद्दा उठाया
प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों से जुड़ी बुनियादी समस्याओं को भी जोरदार तरीके से उठाया गया। बीकेएस ने कृषि कार्यों के लिए बिना किसी रुकावट के 12 घंटे बिजली देने, खराब ट्रांसफॉर्मर को तुरंत बदलने और वितरण स्तर पर कम से कम 10 स्पेयर ट्रांसफॉर्मर रखने की मांग की।
बंद कृषि मंडियों को फिर खोलने की मांग
इसके साथ ही, डीएपी जैसे उर्वरकों की भारी किल्लत का हवाला देते हुए संगठन ने ई-टोकन प्रणाली में सुधार करने, कालाबाजारी और अवैध जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही। सहकारिता समितियों और निजी डीलरों के जरिए खाद का समान वितरण सुनिश्चित करने, फसल पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाने और बंद पड़ी कृषि मंडियों को दोबारा शुरू करने की भी पुरजोर मांग उठाई गई है।

