ब्यावर, 24 अप्रैल। जिला कांग्रेस कमेटी ब्यावर की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में भारतीय जनता पार्टी पर महिला आरक्षण को लेकर झूठ और भ्रम फैलाकर राजनीति करने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि महिला सशक्तिकरण और महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में कांग्रेस की ऐतिहासिक और निर्णायक भूमिका रही है, जबकि भाजपा इस मुद्दे को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस ने कहा कि महिला आरक्षण की शुरुआत का श्रेय कांग्रेस को जाता है। वर्ष 1996 में एच.डी. देवगौड़ा सरकार के दौरान कांग्रेस के समर्थन से पहली बार महिला आरक्षण विधेयक संसद में पेश किया गया था। इसके बाद वर्ष 2010 में यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पारित कराया। साथ ही कांग्रेस सरकार ने 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से पंचायतीराज और नगरीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दी।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को कांग्रेस ने समर्थन देने के साथ इसके तत्काल लागू करने की मांग भी की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों से जोड़कर महिलाओं को तत्काल लाभ से वंचित रखा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि 2023 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बावजूद भाजपा सरकार ने 16 अप्रैल 2026 की रात अधिसूचना जारी कर तीन वर्ष बाद इसे लागू किया, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि भाजपा महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर निराधार आरोप लगा रही है, जबकि 2023 में बिल पारित होने के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया था। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने तीन राज्यों के चुनावों के बीच संसद सत्र बुलाकर महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक कुटिलता दिखाई और परिसीमन को इससे जोड़ने का प्रयास किया, जबकि महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन आवश्यक नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि परिसीमन के जरिए भाजपा देश के राजनीतिक मानचित्र को अपने पक्ष में बदलना चाहती है। राजस्थान के नगरीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में मनमाने परिसीमन, साथ ही असम और जम्मू-कश्मीर के उदाहरण देकर कांग्रेस ने कहा कि भाजपा अपने राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन का दुरुपयोग कर रही है।
प्रेस वार्ता में यह भी सवाल उठाया गया कि 2011 की जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण और परिसीमन की बात करना तथा जातीय जनगणना को लंबित रखना ओबीसी वर्ग के हितों से समझौता है। कांग्रेस ने दोहराया कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना भ्रामक है, क्योंकि पंचायत और नगरीय निकायों में पहले भी बिना परिसीमन के आरक्षण लागू किया जा चुका है।
कांग्रेस ने मांग की कि वर्ष 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को वर्तमान 543 लोकसभा सीटों पर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसे परिसीमन से न जोड़ा जाए। साथ ही जातीय जनगणना समय पर पूरी कर ओबीसी महिलाओं को भी समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
भाजपा के महिला सशक्तिकरण के दावों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस ने कहा कि भाजपा संगठन और चुनावों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती। आज तक भाजपा में कोई महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी, जबकि कांग्रेस ने 110 वर्ष पहले ही महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनी थी। एनी बेसेंट, सरोजिनी नायडू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी जैसे उदाहरण कांग्रेस की प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।
प्रेस वार्ता में कहा गया कि देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार कांग्रेस की देन हैं। इसके विपरीत भाजपा महिला आरक्षण को भी अपने पुराने वादों की तरह जुमला बना रही है और महंगाई, बेरोजगारी तथा किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि महिला आरक्षण महिलाओं का अधिकार है, कोई राजनीतिक उपकार नहीं। कांग्रेस इसे तत्काल लागू कराने के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष जारी रखेगी और महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करती रहेगी।
प्रेस वार्ता में जिला प्रभारी व प्रदेश महासचिव प्रतिष्ठा यादव, जिलाध्यक्ष किशोर चौधरी, पूर्व विधायक राकेश पारीक, ब्यावर प्रत्याशी पारसमल जैन, खनन प्रकोष्ठ प्रदेशाध्यक्ष आशीषपाल पदावत, पूर्व सभापति शांति डाबला, पूर्व सभापति पार्वती जाग्रत, महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव एडवोकेट सुलक्षणा शर्मा, महिला जिलाध्यक्ष इशिका जैन, पूर्व प्रत्याशी मनोज चौहान, ब्लॉक अध्यक्ष एडवोकेट अजय शर्मा सहित कांग्रेस के अनेक प्रमुख नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

