वडोदरा से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। गुजरात सरकार द्वारा लागू किए गए विवादित ‘गुजरात रेंट एक्ट 2026’ के खिलाफ राज्य भर के वकीलों में काफी गुस्सा और नाराजगी है। वडोदरा बार एसोसिएशन इस कानून के विरोध में मैदान में उतर आया है और सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए 1 अक्टूबर से 3 अक्टूबर, 2026 तक सभी तरह की कोर्ट की कार्रवाई से अलग रहकर कड़ा विरोध दर्ज कराने का ऑफिशियल ऐलान किया है।
वडोदरा बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और वकीलों ने मीडिया से आक्रामक अंदाज में बात करते हुए सीधे तौर पर इस कानून को “काला कानून” कहा है।
विरोध के मुख्य मुद्दे और आरोप:
भ्रष्टाचार फैलाना: वकीलों की एसोसिएशन के मुताबिक, रेवेन्यू डिपार्टमेंट में पहले से ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गड़बड़ियां चल रही हैं, वहीं इस नए रेंट एक्ट के लागू होने से भ्रष्टाचार और बढ़ेगा और आम लोगों और प्रॉपर्टी मालिकों का शोषण बढ़ेगा।
अब पार्टियों के बीच लड़ाई: वकीलों का साफ मानना है कि यह कानून जनता के हित में नहीं है, बल्कि जनविरोधी है। वकीलों की एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि इस कानून को तुरंत वापस लिया जाए।
ऑफिशियल रिप्रेजेंटेशन: इस गंभीर मामले में न सिर्फ ज़ुबानी विरोध जताया गया है, बल्कि माननीय मुख्यमंत्री, रेवेन्यू मंत्री और गवर्नर को चिट्ठी लिखकर कानून की कमियों और विरोध के बारे में ऑफिशियल जानकारी दी गई है।
न्यायिक प्रक्रिया पर असर और उग्र आंदोलन को हवा
वडोदरा वकीलों की एसोसिएशन के इस फैसले का अगले 3 दिनों तक वडोदरा की अलग-अलग अदालतों में न्यायिक कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा। वकीलों की इस हड़ताल और गुटबंदी के ऐलान से न्याय मांगने वाले क्लाइंट और पार्टियों को मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन वकीलों ने साफ कर दिया है कि जब
तक यह जनविरोधी कानून वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। ज्वलंत सवाल:
क्या सरकार वकीलों के इस भारी विरोध को देखते हुए ‘गुजरात रेंट एक्ट 2026’ में कोई बदलाव करेगी या इसे रद्द कर देगी?
रेवेन्यू डिपार्टमेंट पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच यह कानून आम नागरिकों के लिए कितना घातक साबित होगा?
यह देखना बहुत दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विरोध वडोदरा तक ही सीमित रहता है या पूरी गुजरात बार काउंसिल इस लड़ाई में शामिल होती है!

