कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब अधिकारियों को ले आने वाली बस बेहद जर्जर हालत में मिली। बस के अंदर सफर के दौरान हुई परेशानी से नाराज कलेक्टर ने तुरंत आरटीओ और एसडीएम को कार्रवाई के निर्देश दिए।
रीवा: जिले में प्रशासनिक सख्ती का एक और मामला सामने आया है। रीवा के गुढ़ तहसील में आयोजित ‘जन विश्वास’ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे जिला कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही एक ऐसा फैसला लिया जिससे परिवहन विभाग और बस संचालकों में हड़कंप मच गया। कलेक्टर जिस बस में सवार होकर अधिकारियों के साथ कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे थे, उसकी जर्जर हालत को देखते हुए उन्होंने तुरंत उसे सीज करने के निर्देश दे दिए।
सफर के दौरान हुई परेशानी पर भड़के कलेक्टर
बताया जा रहा है कि कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए रीवा आरटीओ की ओर से ‘तिवारी ट्रैवल्स’ की बस उपलब्ध कराई गई थी। इसी बस में बैठकर कलेक्टर समेत जिले के कई वरिष्ठ अधिकारी रीवा से गुढ़ पहुंचे थे। हालांकि, सफर के दौरान बस की खस्ताहाल स्थिति और उसमें आ रही दिक्कतों के कारण अधिकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जैसे ही बस गुढ़ में कार्यक्रम स्थल पर रुकी और अधिकारी नीचे उतरे, कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने खुद बस की स्थिति का जायजा लिया। जर्जर और असुरक्षित हालत में चल रही बस को देखकर उनका पारा चढ़ गया।
‘जब अधिकारी परेशान हो रहे हैं, तो आम यात्रियों का क्या…’
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से दो-टूक कहा कि जब इस बस में सफर करने वाले जिम्मेदार अधिकारी ही इतनी परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो सोचिए कि रोजाना इस बस में सफर करने वाले आम यात्रियों को कितनी दुश्वारियों का सामना करना पड़ता होगा।
यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर वाहन की फिटनेस और स्थिति ठीक नहीं है, तो ऐसे वाहनों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासनिक निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल एसडीएम और आरटीओ को निर्देश दिए कि इस बस के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए इसे तुरंत जब्त (सीज) किया जाए। कलेक्टर के आदेश मिलते ही परिवहन विभाग की टीम हरकत में आई और बस को अपने कब्जे में लेते हुए सीज कर दिया।
परिवहन विभाग की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी कार्रवाई के बाद अब प्रशासनिक गलियारों और आम जनता के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह बस पहले से यात्रियों के लिए सुरक्षित थी? क्या आरटीओ की तरफ से इस बस की फिटनेस की नियमित जांच की गई थी या फिर नियमों को ताक पर रखकर इसे सड़क पर दौड़ाया जा रहा था? फिलहाल इस कार्रवाई के बाद आरटीओ और परिवहन विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है।

