सूरत के औद्योगिक गलियारे से एक ऐसा सनसनीखेज और पर्यावरण को हिलाकर रख देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो इंसानियत और प्रकृति के मुंह पर एक करारा तमाचा है। सूरत के पॉश और इंडस्ट्रियल हब कहे जाने वाले पल्साना इलाके में स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंકने का घिनौना खेल बेखौफ चल रहा है। यहां नियमों, कानूनों और पर्यावरण सुरक्षा के تمام मानकों को ताक पर रखकर, बिना किसी पर्याप्त या नाममात्र के ट्रीटमेंट के, कारखानों का जहरीला और अत्यंत प्रदूषित केमिकल युक्त पानी धड़ल्ले से खुले नालों में उड़ेला जा रहा है। सबसे खतरनाक और खौफनाक सच्चाई यह है कि यह जहरीला नाला आगे जाकर सीधे तौर पर ‘मिंडोला नदी’ (Mindhola River) में समाहित होता है, जिससे यह साफ साबित होता है कि नदी को जहर के मुहाने पर धकेलने का यह गंदा खेल इसी CETP से शुरू होता है।
जहरीले केमिकल का प्रलय: भूजल स्तर बर्बाद, जलीय जीव और मवेशी मौत के मुंह में!
फैक्ट्रियों और डाइंग यूनिट्स से निकलने वाले खतरनाक रंगों, एसिड और केमिकल से भरे अपशिष्ट को बिना किसी मानक प्रक्रिया के यूं खुलेआम जलस्रोतों में बहा देना प्रकृति के खिलाफ एक अक्षम्य अपराध है। इस जहरीले पानी के कारण मिंडोला नदी का पानी अपना प्राकृतिक रूप खो चुका है और अब वह बदबूदार काले जहर के समंदर में बदल गया है।
भूजल की तबाही: इस गंदे पानी के रिसने से आसपास के गांवों का बोरवेल और जमीन के नीचे का पानी (Underground Water) पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिसे पीने से लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
कृषि और पर्यावरण का नाश: नदी के पानी से सिंचाई होने के कारण उपजाऊ जमीनें बंजर होती जा रही हैं, और खेतों में उगने वाली फसलें भी जहरीली बनती जा रही हैं।
बेजुबानों की मौत: पानी में घुलने वाले इस भयानक केमिकल के कारण मिंडोला नदी के जलीय जीव (मछलियां और अन्य जीव) तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं, और पानी पीने वाले बेजुबान मवेशी मौत के आगोश में जा रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और CETP संचालकों की मिलीभगत से चल रहा है यह गोरखધંધા!
सवाल यह उठता है कि क्या गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) और स्थानीय प्रशासन को इस खुलेआम चल रहे पर्यावरणीय आतंकवाद की भनक नहीं है? क्या करोड़ों रुपए की लागत से बने इन CETP प्लांटों का काम केवल कागजों पर खानापूर्ति करना और नियमों की आड़ में उद्योगों को खुली छूट देना रह गया है? अधिकारियों और मिल मालिकों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा जहरीला खेल चलना असंभव है।
महानगर मेट्रो न्यूज़ पेपर की हुंकार
प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वाले इन सौदागरों और पल्साना CETP के जिम्मेदार भ्रष्ट संचालकों के खिलाफ यदि तुरंत कड़ी आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई नहीं की गई, तो आने ਵਾਲੀ पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। महानगर मेट्रो न्यूज़ पेपर मांग करता है कि इस पूरे महा-घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो और दोषियों को सलाखों के पीछे धकेला जाए ताकि हमारी जीवनदायिनी नदियों को बचाया जा सके!

