गृह मंत्री के होम टाउन में ही कानून और व्यवस्था पर गंभीर सवाल: शराब, जुआ, ड्रग्स और बढ़ते क्राइम रेट के खिलाफ जनता में फूटा आक्रोश
गुजरात में कागजों पर शराबबंदी के कड़े कानूनी दावे किए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है। राज्य के हीरा और टेक्सटाइल नगर के रूप में विश्वभर में ख्याति प्राप्त सूरत शहर से समय-समय पर जो बेहद चौंकाने वाले दृश्य सामने आ रहे हैं, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। हाल ही में सूरत के समुद्र तट से लावारिस हालत में विदेशी शराब की अनगिनत बोतलें मिलने के दावों और खबरों ने हड़कंप मचा दिया है। सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातों और पुलिस चौकियों के बीच समुद्र तट से शराब की बोतलें मिलना यह साबित करता है कि बुटलेगरों और असामाजिक तत्वों के हौसले कितने बुलंद हैं और उन्हें कानून का कोई डर नहीं है।
सूरत शहर ‘मिनी गोवा’ बन रहा है? – बढ़ती आपराधिक गतिविधियों पर सवाल
राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सी.आर. पाटिल का अपना होम टाउन माने जाने वाले सूरत शहर की वर्तमान स्थिति दिन-प्रतिदिन बेहद चिंताजनक और डरावनी होती जा रही है। जो सूरत शहर अपनी शांति और सुरक्षा के लिए जाना जाता था, वह आज अपराध और नशे के कारोबार के कारण मानो ‘मिनी गोवा’ बनता जा रहा है—ऐसी छवि उभर रही है। शहर में न केवल शराब की खुलेआम बिक्री हो रही है, बल्कि गली-गली में जुए के अड्डे फल-फूल रहे हैं, युवा पीढ़ी को बर्बाद करने वाला ड्रग्स का जहर खुलेआम बेचा जा रहा है और शहर का क्राइम रेट (अपराध ग्राफ) लगातार ऊपर जा रहा है। इन तमाम बातों के कारण आम जनता, व्यापारियों और परिवारों में भारी डर, असंतोष और रोष का माहौल देखने को मिल रहा है।
“बड़ी-बड़ी बातें करने के बजाय सूरत को नशा मुक्त बनाएं”
सार्वजनिक मंचों और मीडिया के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करना और सख्त कदम उठाने के दावे करना हुक्मरानों के लिए आम बात हो गई है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सोशल मीडिया और जनमानस से अब सीधे, तीखे और आक्रामक सवाल उठ रहे हैं कि, “गृह मंत्री साहब, सिर्फ कागजों पर सख्ती दिखाने के बजाय वाकई सूरत शहर को नशा मुक्त और अपराध मुक्त कब बनाएंगे?” सूरत के नागरिक अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे इतना बड़ा अवैध धंधा कैसे चल रहा है?
युवा पीढ़ी की बर्बादी और आगे की रणनीति
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और जागरूक सामाजिक संगठनों का स्पष्ट मानना है कि यदि समय रहते इस असामाजिक सिंडिकेट और बुटलेगरों के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो सूरत की आने वाली युवा पीढ़ी बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएगी। समुद्र तट से शराब मिलने की यह घटना महज एक सामान्य दुर्घटना या छिटपुट घटना नहीं है, बल्कि सूरत में सक्रिय एक मजबूत और समानांतर बुटलेगर नेटवर्क का स्पष्ट प्रमाण है। अब देखना यह है कि प्रशासनिक तंत्र, पुलिस विभाग और सरकार इस मामले में कब नींद से जागकर ठोस, कठोर और अनुकरणीय कदम उठाते हैं, ताकि सूरत की अस्मिता और सुरक्षा वापस लौट सके।

