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नामीबिया से लाए गए मशहूर चीते गौरव की मौत, 4 दिनों से फ्रीज में रखा था कूनो के ‘रॉकस्टार’ का शव

कूनो नेशनल पार्क से एक बुरी खबर सामने आई है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया से लाए गए मशहूर नर चीता ‘गौरव’ (एल्टन) की लंबी बीमारी के बाद सोमवार दोपहर को मौत हो गई। गौरव अपने भाई ‘शौर्य’ के साथ ‘रॉकस्टार्स’ गठबंधन के लिए जाना जाता था, जिसने भारत में चीता पुनर्वास इतिहास में पहली सफल शिकार की घटना को अंजाम दिया था।

श्योपुर: कूनो नेशनल पार्क से भारत के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ को बड़ा झटका लगा है। पार्क के सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक देखे जाने वाले नर चीता ‘गौरव’ की सोमवार दोपहर को लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। नामीबिया से लाए गए इस चीते ने भारत में चीता री-इंट्रोडक्शन प्रोग्राम की शुरुआत में एक अहम भूमिका निभाई थी और वह अपने भाई के साथ मिलकर कूनो के जंगलों की शान बना हुआ था।

‘रॉकस्टार्स’ जोड़ी ने किया था ऐतिहासिक पहला शिकार

मूल रूप से ‘एल्टन’ नाम का यह चीता सितंबर 2022 में नामीबिया से कूनो लाए गए पहले आठ चीतों के जत्थे का हिस्सा था। उसका भाई ‘फ्रेडी’ (जिसे बाद में शौर्य नाम दिया गया) उसका पक्का साथी था। दोनों भाइयों ने मिलकर कूनो में जल्द ही एक मजबूत शिकार गठबंधन बना लिया था। नवंबर 2022 में दोनों भाइयों ने एक वयस्क चीतल का शिकार किया था, जो पिछले 75 से अधिक वर्षों में भारत में दर्ज किया गया पहला सफल चीता शिकार था। पार्क में उन्हें ट्रैक करने वाले अधिकारी और वन्यजीव प्रेमी प्यार से इस जोड़ी को ‘रॉकस्टार्स’ कहते थे। हालांकि, जनवरी 2024 में शौर्य की अचानक मौत के बाद यह जोड़ी टूट गई थी और गौरव अकेला रह गया था।

कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता गौरव की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई।
गौरव और उसके भाई शौर्य ने भारत में 75 साल बाद पहला सफल चीता शिकार किया था।
12 सितंबर से कमजोर और सुस्त पड़े गौरव को क्वारंटाइन बोमा में रखकर इलाज दिया जा रहा था।
गौरव की मौत के बाद अब कूनो में 36 भारतीय-जन्मे शावकों और वयस्कों समेत कुल 51 चीते हैं।

कमजोरी और गंभीर बीमारी से जूझ रहा था गौरव

बीते 12 सितंबर को फील्ड टीमों ने गौर किया कि गौरव काफी कमजोर और सुस्त पड़ गया था। इसके बाद उसे जंगल से रेस्क्यू कर पशु चिकित्सकों द्वारा जांचा गया, जहां उसमें अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों के क्षय और गंभीर डिहाइड्रेशन के लक्षण पाए गए। उसे तुरंत शुरुआती इलाज देने के बाद पालपुर में एक क्वारंटाइन बोमा में शिफ्ट किया गया, जहां उसकी कड़ी निगरानी की जा रही थी। शुरुआती क्लिनिकल जांच में किसी पुरानी गंभीर बीमारी के संकेत मिले थे। तमाम कोशिशों और इलाज के बावजूद गौरव की हालत में सुधार नहीं हुआ और सोमवार को उसने दम तोड़ दिया।

RTI एक्टिविस्ट ने लगाए थे आरोप

चीता गौरव की मौत से पहले आरटीआई कार्यकर्ता अजय दुबे ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने सीधे तौर पर किसी चीता का नाम नहीं लिखा, लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से तीखे सवाल पूछते हुए उन्होंने लिखा कि ‘कूनो में अस्पताल के फ्रीजर में शव रखे हुए चार दिन हो गए, सच कब उजागर किया जाएगा, मुख्यमंत्री जी ध्यान दीजिए।’

गौरव की मौत कूनो के शुरुआती चीता इतिहास के एक बेहद खूबसूरत अध्याय का अंत है। वह और उसका भाई ‘एल्टन-फ्रेडी’ भारत में दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर की वापसी के प्रतीक थे। कूनो प्रोजेक्ट अधिकारी

कूनो में अब कितने चीते बचे हैं?

गौरव के जाने से भले ही एक ऐतिहासिक कड़ी टूट गई हो, लेकिन प्रोजेक्ट चीता अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। चीता प्रोजेक्ट फील्ड डायरेक्टर के अनुसार, गौरव की मौत के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में कुल 51 चीते मौजूद हैं, जिनमें 36 भारत में जन्मे फिलेन (शावक व वयस्क) शामिल हैं। इनमें से 16 चीते वर्तमान में खुले जंगल में स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं। इसके अलावा, चार अन्य चीते गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में भी रह रहे हैं, जिससे देश में कुल चीतों की संख्या अब 55 हो गई है।

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