गुजरात के किसान सड़क पर और नेता अधिकारियों के चरणों में झुके? किसान आंदोलन की आग के बीच, पाटीदार समाज के संस्थाओं के मुखियाओं के खिलाफ जनता का गुस्सा!
अहमदाबाद। जसपुर में विश्व उमियाधाम में पाटीदार किसानों का भारी गुस्सा और हंगामा सामने आया है। एक तरफ पूरे गुजरात के किसान अपने हक, सही दाम और बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों में इस आरोप को लेकर भारी गुस्सा है कि पाटीदार समाज के बड़े संगठन और नेता किसानों के मुद्दे पर चुप बैठे हैं। गुस्साए किसानों ने उमियाधाम परिसर में ऊंची आवाज में नारे लगाए और कहा: “अभी ऐसे संगठनों को तुरंत फंड और दान देना बंद करो!” नेता सत्ता की गुलामी में डूबे हैं, किसान सड़कों पर हंगामा कर रहे हैं! किसानों ने बहुत ही तीखे शब्दों में अपना विरोध जताते हुए कहा कि पाटीदार समुदाय के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपये इकट्ठा करने वाले संगठन और उनके पदाधिकारी सरकार के सामने किसानों का पक्ष रखने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं।
जब किसान सड़कों पर उतरकर अपने हक के लिए लड़ रहे हैं, तब समुदाय के कुछ नेता अधिकारियों की चापलूसी करने और फोटो खिंचाने में लगे हुए हैं। किसानों का सीधा आरोप: संगठन के मंच से समुदाय के नाम पर सिर्फ भाषण देना और जब किसान मुश्किल में हों तो सरकार के खिलाफ मुंह तक नहीं खोलना! जागरूक किसानों का फैसला: “गुजरात के किसान अब जाग चुके हैं। अगर नेताओं ने किसानों के पेंडिंग मुद्दों पर सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, तो समुदाय के खुशहाल किसान इन संगठनों को एक रुपया भी फंड नहीं देंगे।”
सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज: देश भर में पाटीदार किसानों का मोर्चा
गुजरात में किसान इस समय खाद की कमी, बिजली घोटाले और सही दाम न मिलने जैसी कई समस्याओं को लेकर आंदोलन की राह पर हैं। ऐसे समय में विश्व उमियाधाम में हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जमीनी किसान अब समाज के नाम पर हो रही राजनीति और गुटबाजी से तंग आ चुका है। किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर पाटीदार समाज के नेता किसानों के साथ खड़े नहीं हुए और सरकार के खिलाफ मजबूती से अपनी बात नहीं रखी तो आने वाले दिनों में यह विरोध सिर्फ उमियाधाम तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे गुजरात में संस्थाओं के प्रमुखों और चापलूस नेताओं के खिलाफ एक उग्र आंदोलन का रूप ले लेगा!

