मंडी परिषद गोंडा में तैनात रहे तत्कालीन अधिकारी राम नरेश सोनकर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है।
गोंडा: मंडी परिषद गोंडा में तैनात रहे तत्कालीन अधिकारी राम नरेश सोनकर की आय और खर्च के बीच भारी अंतर सामने आने के बाद सतर्कता अधिष्ठान ने शिकंजा कस दिया है। मंडी परिषद गोंडा के पूर्व उपनिदेशक रामनरेश सोनकर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज की है। रामनरेश मौजूदा समय इसी पद पर बांदा में तैनात हैं।
इस रकम के स्रोत के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शासन से अभियोजन की मंजूरी के बाद अयोध्या सेक्टर में एफआईआर दर्ज कराई गई है।जांच में अधिकारी की 67 लाख 82 हजार 681 रुपये की ज्ञात एवं वैध आय के मुकाबले 1 करोड़ 13 लाख 44 हजार 108 रुपये खर्च किए जाने का खुलासा हुआ। यानी जांच के मुताबिक आय की तुलना में 45 लाख 61 हजार 427 रुपये अधिक खर्च किया गया।
कोई संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया
सतर्कता अधिष्ठान अयोध्या सेक्टर की जांच में आय और व्यय के इस बड़े अंतर को लेकर अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन अतिरिक्त खर्च और संपत्तियों के अर्जन के संबंध में कोई संतोषजनक जवाब सामने नहीं आया। इसके बाद शासन स्तर से अभियोजन की स्वीकृति मिलने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
बताया गया कि शासन के निर्देश पर वर्ष 2021 में तत्कालीन अधिकारी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को अभियोजन की स्वीकृति मिली। अगस्त 2026 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
अब मामले की विवेचना सतर्कता अधिष्ठान अयोध्या सेक्टर द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान सामने आए आय-व्यय के आंकड़ों ने मंडी परिषद से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को गंभीर बना दिया है। विवेचना में संपत्तियों, आय के स्रोत और खर्च के अंतर से जुड़े अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जा रही है।

